पूरण सिंह शेखावत, सीकर.
बुजुर्ग और जवान के साथ अब नौनिहाल भी ट्यूबरक्यूलोसिस ‘टीबी ’ की जद में आ रहे हैं। इनमें दो माह से लेकर 14 वर्ष के आयु के 169 बच्चे शामिल है। इनमे एक साल तक के चार बच्चे हैं। जबकि 2017 में टीबी से ग्रसित बच्चों की संख्या 96 रही है और उनमें एक साल से छोटे दो बच्चे ही शामिल थे। चिकित्सकों की माने तो सामान्य फेफडे की बीमारी के रूप में जाने जाना वाली टीबी अब शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर रही है। इनमें सिर, किडऩी, आंत प्रमुख है। इन अंगों के प्रभावित होने पर टीबी का संक्रमण सामान्य जांच में नहीं आ पाता है। एसके अस्पताल और निजी अस्पतालों से जुटाई जानकारी के अनुसार सीकर जिले में हर साल कुल रोगियो में से चार प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। डब्ल्यूएचओ ग्लोबल टीबी रिपोर्ट के अनुसार विश्व में एक करोड लोग टीबी से ग्रसित है। इनमें से 27 फीसदी रोगी देश में है।
एक साल में 218 गंभीर रोगी
सीकर स्थित जिला क्षय रोग निवारण में 2018 में 28839 स्फुटम माइक्रोस्कोपी और 6034 सीबीनॉट जांच हुई। इन जांच में 218 रोगी गंभीर टीबी और 2300 सामान्य टीबी से ग्रसित मिले। इस दौरान 256 एचआइवी, 141 पीडियाट्रिक और 194 एक्ट्रा प्लमोनरी के संभावित रोगी मिले। 2018 में निजी चिकित्सकों की ओर से भेजे गए 1271 संभावित टीबी रोगियों की सीबीनॉट जांच हुई। जिनमें 483 सामान्य टीबी और 74 गंभीर टीबी रोगी मिले। सार्वजनिक क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र के चिकित्सा संस्थानों में एक जनवरी से 31 दिसम्बर 2018 तक टीबी के 5822 टीबी के रोगी सामने आए हैं। जबकि वर्ष 2017 में यह संख्या 3651 मरीज की है।
एड्स से ज्यादा टीबी से मौत
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से पूरी दुनिया में हर साल 24 मार्च को टीबी डे मनाया जाता है। इसका मकसद इस रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना हैं। चिकित्सकों के अनुसार इस समय दुनिया भर में एड्स के बाद सबसे ज्यादा मौतें टीबी से ही हो रही हैं। इसी वजह से टीबी के मरीजों को इलाज के लिए प्रोत्साहित करने व 2025 तक देश को इससे मुक्त करने के लिए राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें घर-घर जाकर टीबी के संभावित रोगियों की पहचान करती हैं।
समय के साथ बढ़ता जाता है रोग
टीबी माइक्रोबैक्टीरियम नाम के जीवाणु से होती है। यह आमतौर पर फेफड़ों पर हमला करता हैं, लेकिन समय के साथ फेफड़ों से हड्डी, लिम्फ ग्रंथि, आंत, प्रजनन तंत्र, त्वचा और मस्तिष्क के ऊपर की झिल्ली में भी फैल जाता है। टीबी के माइक्रोबैक्टीरियम सांस के जरिए शरीर के अंदर पहुंचते हैं। जब टीबी से ग्रस्त व्यक्ति खांसता या बोलता है तो यही जीवाणु हवा के जरिए किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर देते हैं।
टीबी के लक्षण
लगातार कई हफ्तों से खांसी, बार-बार बुखार आना, बलगम के साथ खून आना, भूख न लगना, वजन घटना, सीने में दर्द रहना टीबी के लक्षण है। ऐसे में मरीज की तुरंत जांच होनी जरूरी है। जिला क्षय रोग अधिकारी के अनुसार सीबीनॉट जिले में जांच के दो केंद्र जिला क्षय रोग निवारण केन्द्र और नीमकाथाना में सीबीनॉट और एलईडी माइक्रोस्कोपी मशीन से जांच होती है। इसके अलावा जिले के सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की मुफ्त दवा और जांच भी मिलती है।
यहां टीबी के मरीज की पर्ची के रुपए भी नहीं लगते हैं।
टीबी तीन तरह का होता है, फुफ्सीय टीबी, पेट का टीबी, हड्डी का टीबी। इन तीनों की पहचान और इलाज भी अलग-अलग तरह से किया जाता है। सीबीनॉट मशीन इस प्रकार के रोगियों की जांच के लिए वरदान है। इस जांच में जीवाणु के जीन की पहचान की जाती है। जिससे बेहद सटीक परिणाम आता है। -विशाल सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी





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