सीकर. कभी बिजली के करंट से डरने वाली महिलाएं अब करंट से खेल रही है। शुरूआत में डर के साथ झिझक भी होती थी। लेकिन अब फाल्ट ठीक करने से लेकर शट डाउन जैसे काम आसानी से कर रही है। यह कहानी है सीकर के सहायक अभियंता कार्यालयों में कार्यरत महिला कनिष्ठ अभियंता व तकनीकी कर्मचारियों की। सीएसडी द्वितीय में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता पूनम चौधरी व तकनीकी कर्मचारी गीता ने बताया कि लगभग सात वर्ष पहले उनको विद्युत निगम में नौकरी मिली थी। इस दौरान कई परिचितों ने कहा कि महिला हो, कैसे बिजली निगम में फाल्ट वाले काम करेगी। लेकिन मुसीबतों को मात देकर मन में हौंसला जगाया। शुरूआती निगम अभियंताओं के साथ कर्मचारियों का भी काफी सहयोग रहा। अब नियमित रुप से बिजली से खेल रही है। बकौल पूनम चौधरी, हमने इस क्षेत्र में आगे आने के लिए पढ़ाई की। उस समय भी लोगों ने कहा कि लड़की को कोई दूसरा कोर्स कर लो। लेकिन मन में जुनून था इस क्षेत्र में। तकनीकी कर्मचारी गीता का कहना है कि पढ़ाई और फील्ड के काम में काफी अंतर होता है।
मकर सक्रांति के दिन संभाला मोर्चा
पहली बार महिला कनिष्ठ अभिंयता व तकनीकी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई। लगभग पांच साल पहले शहर में चाइनीज मांझे के कारण पूरी शहर की सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हो गई। इस दौरान महिला कर्मचारियों की टीम ने शहर के कई मार्गो की सप्लाई व्यवस्था बहाल कराई।
चोरी रोकने के लिए उतरी
जिले में बिद्युत चोरी रोकने में भी महिला दस्ता पीछे नहीं है। सीकर जिले की कनिष्ठ अभियंताओं ने विजिलेंस चैकिंग के लिए अलग से महिला दस्ता भी बना रखा है। विद्युत कनेक्शन, कन्ट्रोल रूम सहित अन्य कार्यो में विद्युत निगम की महिला टीम आगे है। एसई विद्याद्यर सिंह ने बताया कि महिला टीम को विद्युत हादसों से रोकने के लिए हाइटेक प्रशिक्षण दिया है।





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