उदयपुर. समुदाय एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय में मंगलवार को उपभोक्ता सशक्तिकरण पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ। बतौर अतिथि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जिस दिन एक बच्चा जन्म लेता है। वह उसी दिन से उपभोक्ता बन जाता है। उपभोक्ता की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि उपभोक्ता जागरूक होगा तो उसे कोई भी ठग नहीं सकता है। उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए कानून भी बनाए गए हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति जेपी शर्मा ने की। इसी प्रकार एमपीयूएटी के पूर्व कुलपति प्रो. उमाशंकर शर्मा ने मंच से विचारों को साझा किया। स्वागत उद्बोधन सामुदायिक एवं व्यवहारिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता प्रो. ऋतु सिंघवी ने की। संयोजिका डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
जैविक खेती व मुर्गी पालन पर दिया जोर
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के तत्वावधान में मंगलवार को जैविक खेती व मुर्गीपालन को लेकर एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन हुआ। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से विशेष क्षेत्र उत्कृष्टता के क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में कृषि एवं पशुपालन वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों, मुर्गीपालकों, कृषि एवं होटल प्रबन्धन के विद्यार्थियों, कार्मिकों ने हिस्सेदारी निभाई।
डॉ. एस. के. शर्मा ने पधारे हुए सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया। सचिव एवं विभागाध्यक्ष, पशु उत्पादन विभाग डॉ. लोकेश गुप्ता ने जागरूकता कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी दी। पशुपालन विभाग के भूतपूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एएल तापडिय़ा ने कहा कि जैविक दूध तथा जैविक सब्जियों की मांग बाजार में बढ़ रही है। पशुओं की संख्या तथा दूध उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। देश के कुल मांस उत्पादन में मुर्गी मांस का हिस्सा लगभग 45 प्रतिशत है।
डॉ. आर. के. धुरिया, अधिष्ठाता, पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, वल्लभनगर ने बताया कि बिना पशुपालन जैविक कृषि संभव नही है। उन्होंने कहा कि उन्नत तकनीकों का उपयोग कर पशुओं तथा मुर्गीपालन जैविक तरीके से किया जा सकता है।
डॉ. ए. के. मेहता, निदेशक अनुसंधान ने कहा कि जैविक कृषि का मतलब पुरानी पद्धति की कृषि से नहीं हैं। 21 वीं सदी की जैविक कृषि आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों के आधार पर खेती जैविक नियमों के अनुसार किया जाता है। जैविक कृषि एवं भविष्य की संभावना विषय पर क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ. एस. के. शर्मा ने बताया कि वर्तमान समय जैविक कृषि का समय हैं। डॉ. ओपी पाटोदिया, डॉ. एमके महला, डॉ. महेन्द्र गर्ग, डॉ. एसएम माथुर, डॉ. आईजे माथुर, डॉ. जीएस तिवारी, डॉ. आरएच मीणा, डॉ. वीरेंद्र सिंह एवं अन्य मौजूद थे।





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