बीकानेर. नाबालिग लड़की से बलात्कार के छह साल पुराने मामले में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम न्यायालय बीकानेर के पीठासीन अधिकारी अमित कड़वासरा ने अभियुक्त को सात साल का सश्रम कारावास और 37 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। उन्होंने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया।
विशिष्ट लोक अभियोजक शिवचंद भोजक ने बताया कि न्यायालय में अभियुक्त संदीप के खिलाफ पेश गवाह और सबूतों के आधर पर उसे बलात्कार का दोषी करार दिया गया। प्रकरण में 11 गवाहों के बयान तथा 28 दस्तावेजी रिकॉर्ड पेश किए गए।
इस पर न्यायालय ने अभियुक्त को धारा भादंसं की धारा 363, 366, 376/ 3/4 पोक्सो एक्ट में दोषी माना। न्यायालय ने धारा 363 में चार साल की सजा, 10 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
धारा 366 में पांच साल का कारावास, 12 हजार का जुर्माना और जुर्माना अदा नहीं करने पर सात माह का अतिरिक्त कारावास। 376/3/4 पोक्सो एक्ट में सात साल की सजा, 15 हजार का जुर्माना लगाया है। जुर्माना भरने पर नौ माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ चलेंगी। पीडि़ता को राज्य सरकार की ओर से प्रतिकर राशि देने की अनुशंसा भी की गई।
यह है मामला
नौ फरवरी, 2013 को पीडि़ता के पिता की ओर से कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया गया। रिपोर्ट में शीतला गेट के अंदर पीपा क्षत्रिय भवन के सामने रहने वाले संदीप उर्फ बाबू पुत्र राजकुमार दर्जी पर नाबालिग बेटी से बलात्कार करने का आरोप लगाया। रिपोर्ट में बताया कि सात फरवरी, 2013 को अभियुक्त उसकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसला कर विजयनगर, जयपुर, रायसिंहनगर व ब्यावर ले गया। उसने ब्यावर में छह दिन तक बलात्कार किया।





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