श्रीगंगानगर। रास्ता भटक जाने के कारण सीमा पार कर भारत व पाकिस्तान में प्रवेश करने वाले वाले हर व्यक्ति को दोनों ही देश घुसपैठिया मान कर जेलों में ठूंस देते हैं। फिर किस्मत ही तय करती है कि वे अपने घर लौट पाएंगे या नहीं। वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन के वतन वापसी को लेकर पूरे देश की निगाहें वाधा बोर्डर पर बनी रही।
कुछ लोग पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खां की उदारता की बात कहे लेकिन हमारे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयेपी ने भी बॉर्डर पार आए लोगों को वापस वतन भिजवाने में कोई असर नहीं छोड़ी है। श्रीगंगानगर जिले की भारत-पाक अन्तरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान से रास्ता भटक कर आए मुनीर खां की हकीकत किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। करीब तेरह साल के इस किशोर को यह भी पता नहीं था कि सरहद क्या होती है। मुनीर को जब हमारे देश में आने और उसे पहले जेल और फिर बाल सुधार केन्द्र में रखा तो उसे अपने देश की भूमि से बाहर होने का अहसास हो गया था। इस किशोर मुनीर को वतन वापसी के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजयेयी ने आंतक के पर्याय कहे जाने वाले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया था। वाजेयपी का यह जादू था कि इस किशोर मुनीर की वतन वापसी हो पाई।
श्रीगंगानगर जिले में केसरीसिंहपुर से लगती भारत-पाक अन्तराष्टी्रय सीमा पर करीब तेरह वर्षीय किशोर मुनीर अपने मुल्क से भटकता हुआ भारत की सीमा में 26 जून 2003 को आ गया था। पाकिस्तानी इस किशोर के आने से बीएसएफ सहित खुफिया जांच एजेसिंयों ने उससे पूछताछ की थी। जांच मं यह साबित हो गया कि वह भूलवश हमारे देश की सीमा में प्रवेश कर गया था। ऐसे में बीएसएफ ने गिरफ्तार उसे पुलिस को सौंप दिया। तब तेरह साल का मुनीर गाएं चराता था। मुनीर इतना अबोध इतना...बॉर्डर क्रॉस कर भारत मेंं घुस आने के बावजूद उसे मालूम ही नहीं था कि वह किसी दूसरे देश में आ पहुंचा है।
दो देशों की बात पर वह बार-बार कहता-अच्छा! ऐह तुहाडा पिंड ओह मेरा पिंड (अच्छा यह तुम्हारा गांव है और वह मेरा गांव)। इस किशोर मुनीर की पाकिस्तान वापसी को लेकर तब राजस्थान पत्रिका में समाचार लगातार अभियान के तहत चलाएं गए। इन समाचारों का यह असर था कि प्रदेशभर के लोग मुनीर के पक्ष में आ खड़े हुए। यहां तक कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मुनीर की वतन वापसी के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और दिल्ली स्थित पाक दूतावास से संपर्क किया था।
वहीं इलाके में विंग कमांडर अभिंनदन की तरह हीरो बने इस मुनीर के रहने को लेकर श्रीकरणपुर के तत्कालीन उपखंड अधिकारी बैकफुट पर आ गए। उन्होंने श्रीकरणपुर सब जेल में काट रहे न्यायिक हिरासत से इस मुनीर को बीकानेर बाल सुधार गृह भिजवा दिया। बाल सुधार गृह मेंं बीकानेर की बच्चियों ने मुनीर को राखियां बांधकर उसके वतन वापसी की दुआएं की गइ। आखिरकार प्रधानमंत्री वाजपेयी ने 9 अगस्त 2003 को मुनीर को दिल्ली-लाहौर बस से पाकिस्तान के भेजने के आदेश दिए।





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