- नरेंद्र वर्मा
भीलवाड़ा। वस्त्रनगरी भीलवाड़ा के बड़ी हरणी गांव के बाशिंदों ने होली पर्व (Holi 2019) अनोखे अंदाज में मनाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान किया है। शहर से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित बड़ी हरणी गांव में ग्रामीणों का होली पर्व मनाने का अलग ही अंदाज है। एक और जहां देशभर में लोग होली के पर्व पर पेड़ काटकर होली का दहन करते हैं, वहीं बड़ी हरणी के बाशिंदे ऐसा नहीं कर सोने-चांदी से निर्मित होलिका की पूजा करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीणों के इस प्रकार पर्व मनाने का मतलब यह भी नहीं है कि यहां होली नहीं मनाई जाती, बल्कि उसी उत्साह, उमंग तथा श्रद्धापूर्वक होली पर्व मनाया जाता है। फर्क इतना होता है कि यहां पेड़ बचाने के लिए होली पर लकडिय़ां नहीं जलाकर पर्यावरण संरक्षण के लिए चांदी से निर्मित होलिका की पूजा की जाती है।
होली के दिन शाम लगभग 7 बजे चारभुजा मंदिर में एकत्र होकर पूरे गांव के ग्रामीण ढोल के साथ होली चौक पहुंचते हैं। जहां गांव के पंच-पटेल नंदराम जाट, गणेश जाट, शंकर लाल जाट, रामलाल जाट, रामेश्वर जाट, शंकर लाल जाट, माधव लाल जाट, लक्ष्मण सिंह, बनवारीलाल तेली, पार्षद शंकर जाट, रामलाल जाट, रामस्वरुप जाट, ,हरी सुथार, नंदराम जाट, शिवलाल जाट मोहनलाल जाट,मुकेश जाट सहित सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति में पंडित गोपाल शर्मा ने विधिवत रूप से चांदी से निर्मित होली की पूजा की। महिलाओं ने होली के गीत गाए। पूजा अर्चना के बाद फिर से ग्रामीण चारभुजा मंदिर आकर होली को मंदिर में विराजमान कराया।
इसलिये करते हैं ऐसा
करीब 70 से 80 साल पूर्व इस गांव होली त्यौहार पर पेड़ काटने को लेकर ग्रामीणों के बीच विवाद हुआ था। इसे निबटाने के लिए चारभुजानाथ मंदिर पर ग्रामीणों ने एकत्रित होकर निर्णय लिया कि होली पर पेड़ नहीं काटेंगे और गांव के प्रत्येक घर से चंदा एकत्रित कर चांद और और सोने से निर्मित पेड़ का प्रतीक बनाया। तब से आज तक परंपरा को जीवित रखते हुए सोने-चांदी निर्मित होलिका पूजन करते आ रहे हैं।





No comments:
Post a Comment