चूरू. चूरू जिले सहित पूरे प्रदेश के प्रत्येक जिले में नंदीशाला खोलने की घोषणा करीब एक साल बाद भी पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है। गांवों एवं शहरो में नर गोवंश की बढ़ती संख्या एवं उनके कारण उत्पन्न हो रही समस्या से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार ने गत वर्ष बजट में हर जिले में एक-एक नंदीशाला खोलने की घोषणा की थी, लेकिन चूरू जिले सहित प्रदेश के ज्यादातर जिलों में एक वर्ष बाद भी नंदीशाला की फाइल धूल फांक रही है। हालांकि पशुपालन विभाग ने गत वर्ष जुलाई में नंदीशाला के लिए चूरू जिले में इच्छुक समितियों, गोशालाओं व व्यक्तियों से आवेदन मांगे थे लेकिन पशुपालन विभाग को गिने-चुने ही आवेदन मिले। उनकी जांच करने पर चूरू व राजगढ़ के आवेदनों को उपयुक्त नहीं माना गया और सरदारशहर के आवेदन में न्यायिक बाधा आ गई, ऐसे में राजलदेसर की नाथ सेवा समिति के आवेदन को पात्रता के अनुसार ठीक माना लेकिन सरकारी शर्तों को टेढ़ा (जटिल) मानकर समिति हाथ पीछे खींच लिए। इस कारण नंदीशाला की फाइल आगे नहीं बढ़ सकी। तब पशुपालन विभाग ने दिनांक 5 जनवरी 2019 को चूरू जिले की सभी गोशाला प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक चूरू में बुलाकर प्रस्ताव मांगे लेकिन सभी गोशाला प्रतिनिधियो ने शर्तो में छूट, निर्माण कार्य सरकारी एजेंसी की बजाय सम्बन्धित समिति को बनाने व गोवंश संख्या में छूट देने की बात रखी। विभाग ने शर्तों में छूट के सुझावों को निदेशालय भिजवाया लेकिन वहां पर छूट को लेकर कोई निर्णय नहीं किया जा सका है। अभी गोशाला को छोटे पशु 16 रुपए व बड़े पशु पर 32 रुपए का सरकारी अनुदान दिया जा रहा है।
मिलेगा 50 लाख रुपए का अनुदान
मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के बाद राज्य के गोपाल विभाग द्वारा गत वर्ष 7 जून को परिपत्र जारी किया गया, जिसके अनुसार कोई भी संस्था या पंजीकृत गोशाला नंदी गोशाला के लिए आवेदन कर सकेगी। नंदी गोशाला में 500 या 500 से अधिक नर गोवंश को रखा जा सकेगा। इसके लिए खुद की जमीन या फिर सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त लीज की भूमि उपलब्ध होने पर 50 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाएगा। चूरू जिले में इनके तहत गत वर्ष 10 जुलाई को आवेदन मांगे थे, लेकिन एक ही आवेदन आया। तिथि निकलने के बाद दो आवेदन ओर आ गए, जिसको लेकर विभाग ने जयपुर उच्चाधिकारियों को भेजे।
परिवहन रोक से दुर्दशा
जब से तीन साल तक के बछड़ों के परिवहन पर रोक लगी है, तब से नागौरी नस्ल के गोवंश की दुर्दशा हो रही है। जिले में भरने वाले दो पशु मेले समाप्त होने के कागार पर पहुंच चुके हंै। परिणामस्वरूप जिले में लावारिश गोवंश की संख्या लगातार बढ़ रही है। गायों के लिए तो गोशालाएं खोली जा चुकी हंै।
गोवंश पहुंचा रहा फसलों को नुकसान
वर्ष 2012 की पशुगणना के अनुसार जिले में जहां गोवंश की संख्या तीन लाख 47 हजार 470 थी, वहीं नर गोवंश की संख्या करीब 40 हजार से ज्यादा थी। ग्रामीण क्षेत्रों में लावारिश घूमने वाला नर गोवंश फसलों को जमकर नुकसान पहुंचा रहा है। शहरी क्षेत्रों में न केवल गंदगी फैलाते हैं बल्की लड़ते-लड़ते वाहनो एवं आमजन को भी नुकसान पहुंचा रहे है। गोवंश के कारण आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हा रही है।
देखें पशु गणना के आंकड़े
पशु गणना (2012 के अनुसार)
- गोवंश ३४७४७०
- भैंस २९२५७१
- बकरी ८२००४३
- घोड़े ८२४
- ऊंट ३३०५९
- भेड़ ३४८५२२
(आंकड़े विभाग के अनुसार)
&नंदीशाला के लिए गत वर्ष आवेदन मांगे थे, एक प्रस्ताव पर जब अंतिम विचार होने लगा तब उसने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद के प्रस्ताव मानकों पर खरे नहीं उतरे, फलस्वरूप 173 गोशाला संचालको के साथ बैठक पर चर्चा की। गोशाला संचालको ने सरकारी नियमो में छूट चाही जिनके प्रस्ताव जयपुर भेजे गए हंै। वहां से जैसे निर्देश मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डा. जगदीशप्रसाद, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग, चूरू
&सरकारी नंदीशाला चलाने में नियम/शर्तें कठिन हंै। सरकारी झंझट से बचने के लिए राजलदेसर में जनसहयोग से नंदीशाला 6माह पहले शुरू की जा चुकी है। 600 से ज्यादा पशु हैं।
ललित पारीक, प्रदेशाध्यक्ष गोग्रास सेवा संघ, राजलदेसर।





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