करौली. देश में लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं। कांग्रेस-भाजपा सहित अन्य पार्टियां चुनावी तैयारियों में जुटी हैं। इस बीच राजस्थान पत्रिका की ओर से इस चुनाव में क्या होंगे खास मुद्दे और जनता कैसा जनप्रतिनिधि चाहती है जैसे सवालों को लेकर संसदीय क्षेत्र की यात्रा शुरू की गई। इसी के तहत रविवार को करौली-धौलपुर संसदीय क्षेत्र में करौली विधानसभा के अन्तर्गत आने वाले दीपपुरा गांव में मतदाताओं से चर्चा की तो उनके मुद्दे और समस्याएं सामने आईं।
करौली. चुनाव चाहें केन्द्र सरकार के लिए हो रहा हो लेकिन मीना बाहुल्य दीपपुरा गांव में मतदाताओं ने दर्द अपने गांव का ही ज्यादा बयां किया। वे बोले कि जिसकी राज्य में सरकार थी उसी पार्टी का सांसद था फिर भी गांव की दशा नहीं सुधरी। ग्रामीणों का कहना था कि चुनाव में नोटबंदी, जीएसटी, राफेल, सर्जिकल स्ट्राइक तो मुद्दे रहेंगे ही। साथ ही ग्रामीण अपने गांव के आदर्श तमगे के बावजूद विकास नहीं हो पाने को लेकर आहत नजर आए। गांव के रामकेश मीना, लक्खीराम, गुन्ना, मनरूप, अमरपाल, रविन्द्र मीना, रत्ते मीना, लवकुश मीना आदि ने कहा कि उनके गांव को आदर्श गांव का तमगा मिला हुआ है, लेकिन गांव में सड़क तक नहीं बनी है।
बारिश में रास्ते लबालब हो जाते हैं। सड़क-नालियों के अभाव में पानी घरों तक में प्रवेश कर जाता है। रामकेश मीना ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कालाधन वापस लाने का वादा किया, लेकिन अब तक कालाधन नहीं आया। योजनाओं का सभी लोगों को लाभ नहीं मिला।
जनप्रतिनिधि को लेकर रामकेश ने कहा कि ऐसा जनप्रतिनिधि हो जो जनता के संपर्क में रहे। विकास कराए और समस्याओं का समाधान हो। रविन्द्र मीना बोले कि जनप्रतिनिधि ऐसा हो जो सबका साथ सबका विकास की बात करे। चुनाव में नोटबंदी, जीएसटी, राफेल, सर्जिकल स्ट्राइक आदि मुद्दे प्रभावी होंगे। रामकेश मीना ने कहा कि महंगाई बढ़ी है। क्षेत्र में जनप्रतिनिधि आते नहीं हैं। बारिश में गांव में पानी भरने की समस्या रहती है। रामकेश बोले कि अब मतदाता जागरूक है। चुनाव में महंगाई, जीएसटी आदि सब मुद्दों पर मंथन किया जाएगा।
हाइवे के किनारे के गांव में राहें बदहाल
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित करौली-धौलपुर संसदीय क्षेत्र के करौली मुख्यालय से करीब 6 किलोमीटर धौलपुर हाइवे पर दीपपुरा गांव स्थित है। चमचमाते हाइवे की सड़क किनारे ही आदर्श गांव दीपपुरा का बोर्ड नजर आया। गांव में प्रवेश के लिए हाइवे से नीचे उतरते ही क्षतिग्रस्त हाल सड़क से रू-ब-रू हुए।
सोचा अन्दर पक्की सड़क होगी, लेकिन एक चौराहे पर पहुंचे तो वहां जाकर क्षतिग्रस्त हाल की सड़क भी नजर नहीं आई और सब तरफ के रास्ते कच्चे दिखे। चाय की एक दुकान पर कुछ लोग चर्चा कर रहे थे। हमें देख बोले कहां से आए हो, हमने परिचय दिया और गांव आने का कारण बताया तो बोले भय्या यहां तो ना सड़क है ना समुचित पानी। बारिश में जरुर गांव के रास्ते लबालब हो जाते हैं। आने-जाने का रास्ता तक मुश्किलभरा होता है। इस बीच गांव के कुछ बुर्जुग और युवा भी वहां आ गए।
समीप ही एक झोपड़ी में सभी लोग बैठे और लोकसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई। चाय की चुस्कियों के बीच चर्चा में गांव का विकास नहीं हो पाने का दर्द सामने आया। वे बोले कि दशकों पहले से दीपपुरा गांव को आदर्श गांव कहा जाता है, लेकिन विकास के दृष्टिकोण से गांव में आदर्श जैसा कुछ नहीं है। यह गांव मीना बाहुल्य इलाका है। साथ ही इलाके की राजनीतिक आवोहवा को अदलने-बदलने में इस गांव की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।
यह मुद्दे प्रमुख रूप से उभरे
गांव में सड़क की हालत बदतर।
बिजली की समुचित आपूर्ति नहीं।
आवागमन के सार्वजनिक साधनों की कमी।
बड़ा गांव फिर भी चिकित्सा व्यवस्था नहीं।
करौली क्षेत्र में रोजगार का अभाव।





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