अजमेर.
शहर को स्मार्ट और हरा-भरा बनाने की योजना के तहत प्रस्तावित वृक्ष कुंज का अधूरा है। यहां हरियाली का इंतजार है। पानी के अभाव में वन विभाग द्वारा लगाए गए कई पौधे सूख चुके हैं। कुछेक पौधे ही जड़ें पकड़ पाए हैं।
शहर में यूं तो सुभाष उद्यान सहित कई इलाकों में पेड़-पौधे लगे हुए हैं। शास्त्री नगर-लोहागल रोड पर नगर वन उद्यान भी बनाया जा रहा है। लेकिन एक साथ किसी बड़े इलाके में घने पेड़ नहीं दिखते हैं। खासतौर पर जयपुर रोड घूघरा घाटी से अशोक उद्यान तक यही स्थिति है। लिहाजा वन विभाग ने राजस्थान लोक सेवा आयोग के सामने प्राइवेट बस स्टैंड से सटे इलाके में वृक्ष कुंज बनाने का फैसला किया है।
लगाए जाने हैं ये पौधे
प्रस्तावित वृक्षकुंज में कई प्रजातियों के पौधे लगाए जाने हैं छायादार पौधों में करंज, शीशम, अमलताश, नीम, बड़, सेमल, कचनार, गुलमोहर, अशोक, शीशम, गुलर और पुष्पीय पौधे में गुलाब, चांदनी, चमेली, गुड़हल, नाग चम्पा, कनेर, बोगनवेलिया, रात रानी, क्रोटन, रेलिया शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा फलदार पौधों में अमरूद, जामुन, सीताफल, अनार, इमली, गौंदा, फालसा और अन्य लगाने प्रस्तावित हैं। कुछ खास औषधीय महत्व के पौधे भी लगाए जाने हैं।
यह है वृक्ष कुंज की स्थिति
वृक्ष कुंज में कुछेक पौधे ही लगाए गए हैं। इनमें से कई तो पानी के अभाव में सूख चुके हैं। कुछ पौधों ने जड़ें पकड़ी हैं। इसके अलावा यहां सिर्फ खाली जमीन नजर आती है। बड़े पैमाने पर पौधरोपण नहीं किया गया है। विभाग ने वृक्ष कुंज की फेंसिंग जरूर कराई है। इस क्षेत्र में जरख, सेवली और अन्य जीव-जंतु के अलावा बड़े पेड़ों पर तोता, मैना, कोयल और अन्य पक्षी भी हैं।
वरना अजमेर होता हरा-भरा
वन विभाग ने जापान परियोजना, नाबार्ड सहित कई सरकारी योजनाओं के तहत विभिन्न इलाकों में पिछले 40 साल में पौधरोपण कराया। करीब 35-40 लाख से ज्यादा पौधे लगाए गए। कम बरसात और पानी की कमी से करीब 25 लाख पौधे तो नष्ट हो गए। बचे हुए पौधे किसी तरह चल पा रहे हैं। मालूम हो कि साल 2015 में कम बरसात के चलते विभाग को ढाई हजार के बजाय 1 हजार हेक्टेयर इलाके में ही पौधरोपण कराना पड़ा था।





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