जयपुर. इंस्पेक्टर प्रकाशचंद ने एसीबी से बचने के लिए रिश्वत में नकद लेन-देन की बजाय परिवादी से डेढ़ करोड़ रुपए कीमत का प्लॉट मांगा था। परिवादी ने मना किया तो इंस्पेक्टर ने दलाल शांतिलाल को परिवादी से मिलवाया। दलाल के मार्फत ही बातचीत कर किस्तों में 90 लाख रुपए लिए। इसके बाद भी इंस्पेक्टर 60 लाख रुपए के लिए परिवादी को धमकाता रहा।
आइजी दिनेश एमएन ने बताया कि आनंद भवन गृह निर्माण सहकारी समिति और राजारामपुरा गृह निर्माण सहकारी समिति के करीब 18 मामले हाइकोर्ट के आदेश से जांच के लिए सीबीआइ को भेजे गए थे। ये मदर टैरेसा नगर से जुड़े हैं। इनमें से 3 मामले प्रकाशचंद को जांच के लिए दिए गए थे। आरोप है कि जांच संभालते ही प्रकाशचंद परिवादी को गिरफ्तार करने की धमकी देकर दलाल शांतिलाल के जरिए रिश्वत मांगने लगा। सीबीआइ में होने के कारण प्रकाशचंद ने रिश्वत मामले में जांच एजेंसियों की निगाह से बचने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रखे।
कॉलोनी में बना चर्चा का विषय
टीम ने प्रकाश के घर गुरुवार रात से ही तलाश शुरू कर दी थी लेकिन कॉलोनी वालों को शुक्रवार को पता चला। पुलिस की गाड़ियां देख आसपास की महिलाएं भी वहां जुट गईं। स्थानीय निवासी संगीता, भारती देवी और संतोष ने बताया कि रहन-सहन और बातचीत से कभी आभास नहीं हुआ कि प्रकाशंचद रिश्वतखोर है। उसके कारनामे सामने आए तो कॉलोनी में हर कोई इसकी चर्चा करता नजर आया।
छह प्लॉट, जमीन के दस्तावेज मिले
मानसरोवर के रजनी विहार में प्रकाश के घर एसीबी को 6 प्लॉट, 20 बीघा जमीन के दस्तावेज मिले हैं। आरोपी के घर से गृह निर्माण समिति और सीबीआइ से संबंधित कई दस्तावेज जब्त किए हैं। एक कमरा बंद मिलने पर एसीबी ने उसे सील कर दिया। इसे बाद में खोलकर जांच की जाएगी।
नहीं मिल रहा रिकॉर्ड
सहकारी समितियों का रिकॉर्ड भी रहस्य बना हुआ है। सीबीआइ ने पहले सोसायटी से रिकॉर्ड मांगा तो पदाधिकारियों ने कहा कि तत्कालीन अवसायक को जमा करा दिया था। तब अवसायक सहकारी विभाग के अधिकारी सुनील चौधरी थे। वह सचिवालय नगर से जुड़़े फर्जीवाड़े में लम्बे समय से जेल में हैं। ऐसे में सीबीआइ टीम 3 दिन पहले रिकॉर्ड के लिए सहकारी विभाग पहुंची थी।





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