इसमें से तीन मामले एक ही क्षेत्र के हैं। जबकि चार मामलों में बच्चों का बाहरी तौर पर ही इलाज करवाया जा रहा है। खसरे के बढ़ते हुए प्रभाव को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने संबंधित क्षेत्र में सर्वे कर आसपास के लोगों की जांच शुरु कर दवा पिलाई जा रही है। चिकित्सा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अलवर शहर के हरबक्स का मोहल्ला में तीन बच्चों में खसरा होने की पुष्टि हुई है। इनमें बालक आरव की उम्र चार साल है तथा बालिका मानवी की उम्र सात साल है। जबकि एक बालक की उम्र 5 साल है। इससे पूर्व भी इसी क्षेत्र में तीन अन्य बच्चों को भी खसरा होने पर उपचार करवाया गया। इनकी उम्र भी 4 से 7 साल की है।
नहीं लगवाए जाते हैं टीके : गौरतलब है कि खसरे की रोकथाम के लिए जन्म के 9 माह बाद ही शिशु को खसरे का टीका लगवाया जाता है। लेकिन लोग टीकाकरण को लेकर जागरुक नहीं है। कुछ लोग तो टीके लगवाने से कतराते हैं। ऐसे में इन लोगों के बच्चों में खसरा होने की आशंका रहती है।
&अज्ञानता के चलते लोग आज भी खसरे का उपचार नहीं कराते हैं। समय पर टीके नहीं लगवाते हैं। बल्कि खसरा होने पर झांड फूंक करवाते हैं । इससे रोग खत्म नहीं होता है। अभी तक हमारे पास तीन ही मामले आए हैं। इससे पहले भी मामले आए थे, लेकिन उनको प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
डा. महेश शर्मा, प्रभारी, शिशु चिकित्साल, अलवर।





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