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वक्त सियासत सौंपने का, वैभव-दुष्यंत होंगे गहलोत-वसुंधरा के विरासती चेहरे

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह इस बार एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ते दिखाई दे सकते हैं। दुष्यंत सिंह का यह चौथा चुनाव होगा जबकि वैभव पहली बार चुनावी मैदान में भाग्य आजमाएंगे। राजनीतिक विश्लेषक इस चुनाव को राज्य के दो दिग्गज नेताओं की राजनीति का पारिवारिक हस्तांतरण के तौर पर देख रहे हैं।

 

बीते दो दशक से राज्य की राजनीति अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे के इर्द-गिर्द घूमती रही है। दोनों नेताओं की उम्र 65 साल से पार हो चुकी है और अब वह उनकी सियासी विरासत को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। इसके लिए लोकसभा चुनाव को माकूल मौका माना जा रहा है। जहां दुष्यंत तीन बार सांसद रह चुके हैं और झालावाड़, बारां और धौलपुर की राजनीति में उनका खासा दखल है।

 

इस चुनाव के बाद दुष्यंत का प्रभाव प्रदेश में देखने को मिलेगा। वहीं वैभव संगठन में काम करते रहे हैं और चुनाव मैदान में बाजी मारकर वह प्रदेश में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश में हैं। यह चुनाव दोनों ही नेता पुत्रों के साथ सूबे की राजनीति के हस्तांतरण तय करने वाला साबित हो सकता है। हालांकि अभी दोनों के टिकट को लेकर उनके राजनीतिक दलों ने हरी झंडी नहीं दी है

 

दुष्यंत सिंह
दुष्यंत सिंह ने शुरुआत 2003 में पूर्व सीएम वसुंधरा के विधानसभा चुनाव को संभाल कर की। तब वह एक साधारण कार्यकर्ता के तौर पर काम किया था। वसुंधरा के प्रदेश में सक्रिय रहने पर झालावाड़ और बारां की स्थानीय राजनीति को दुष्यंत ही संभालते रहे हैं।

 

ऐसे में उनके नेतृत्व में चुनाव लडऩा और संगठन चलाने का काम होता रहा। इस बार भी वह झालावाड़-बारां से दावेदार हैं। इस सीट से वसुंधरा भी पांच बार लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं। झालावाड़ से राजनीति करते हुए वसुंधरा दो बार मुख्यमंत्री रहने के अलावा केन्द्र में मंत्री, भाजपा की प्रदेशाध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव रह चुकी हैं। हाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रदेश में हार मिली हो, लेकिन झालावाड़ की सभी चारों और बारां की चार में से एक सीट पर भाजपा को जीत मिली है।

 

दुष्यंत सिंह को जनसंपर्क में लेदर स्लीपर पसंद
दुष्यंत को पजामे-कुर्ते में रहना पसंद है। वह जनसंपर्क के दौरान लेदर स्लीपर पहनना पसंद करते हैं। तेज सर्दी के दौरान स्लीपर की जगह स्पोर्ट्स शू पहनते हैं। वह भी वसुंधरा की तर्ज पर कार्यकर्ताओं को नाम से पुकारने और परिजन के हालचाल पूछकर संवाद कायम करते हैं।


वैभव गहलोत
39 वर्षीय वैभव की राजनीति में सक्रियता को 13 वर्ष बीत चुके हैं। वैभव 2006 में युवक कांग्रेस से जुड़े। 2010 में नाथद्वारा क्षेत्र से प्रदेश कांग्रेस सदस्य बने। 2014 में प्रदेश कांग्रेस महासचिव बनेा। तब से वह सक्रिय हैं। गत वर्ष उन्हें एआइसीसी का सदस्य बनाया गया। वैभव पिता गहलोत की विस सीट सरदारपुरा का प्रचार संभालते रहे हैं। अन्य सीट पर भी वह प्रचार करते हैं। उनका नाम जोधपुर, जालोर-सिरोही समेत कई लोकसभा क्षेत्र से चल रहा है। हालांकि उनके जोधपुर से उतरने की संभावना ज्यादा है।

 

इसकी वजह गहलोत की सक्रियता और इस सीट को वैभव के लिए सुरक्षित माना जा रहा है। यहां से खुद गहलोत को राजनीति करते 45 साल से अधिक हो गए हैं। वह जोधपुर से पांच बार सांसद और सरदारपुरा से पांच बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। यहीं से ही वे तीसरी बार राज्य के सीएम बने। यही पर राजनीति करते हुए वह तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने और केन्द्र में मंत्री भी रहे। साथ ही कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के पदों पर भी रहे हैं।

 

वैभव को सफेद कपड़े पहनना पसंद
वैभव गहलोत लो प्रोफाइल में रहते हुए अपना काम करते रहे हैं। उनका सफेद कपड़ों से लगाव ज्यादा है। मृदुभाषी होने के साथ ही वह कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद रखने में विश्वास रखते हैं। कुर्ते-पायजामा के अलावा वह पेंट और शर्ट में भी नजर आते हैं लेकिन रंग सफेद।



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