सीकर. शहर के न्यायालय परिसर में बंदियों की पेशी के लिए बनी हवालात सुरक्षा मापदंडों पर खरी नहीं है। गैंगवार से प्रभावित इस क्षेत्र में भी हवालात के सामने दीवार नहीं है। ऐसे में हर समय खतरा मंडराने के साथ बंदियों के परिजन भी उनसे मुलाकात करने का प्रयास करते हैं। पुलिसकर्मियों के रोकने पर दूर से खड़े होकर इशारों में बातचीत यहां सामान्य है। दो माह पहले बंदी को सामान देने के प्रयास रहे कर युवक को रोकने पर चालानी गार्ड से मारपीट का भी प्रयास किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की ओर से हवालात के सामने दीवार बनवाने के लिए जिला कलक्टर को पत्र भी लिखा गया है।
पेशी पर आते हैं कुख्यात अपराधी
सीकर से प्रदेश के कुख्यात अपराधियों का नाता है। शातिर अपराधी राजू ठेहट, सुभाष बराल से लेकर कई बड़े अपराधियों को यहां पेशी पर लाया जाता रहा है। आपसी रंजिश के चलते एक दूसरे पर हमले की आशंका के चलते पुलिस जेल से हवालात तक कड़ी सुरक्षा में यहां लेकर आती है। यहां आने के बाद उन्हें हवालात में बंद कर दिया जाता है। पुलिस को कई बार हमले की आशंका की सूचना मिली है। ऐसे में पुलिसकर्मी घेरा बनाकर सुरक्षा देने का प्रयास करते हैं। पुलिसकर्मियों का कहना है कि हवालात के सामने दीवार नहीं होने के कारण दूर खड़े लोग उन्हें देखते रहते हैं। उनके परिचित मिलने और सामान देने का प्रयास करते हैं। ऐसे में यहां हमले की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
दीवारें कमजोर, सुविधाओं की कमी
न्यायालय परिसर में बनी हवालात की दीवारें भी कमजोर है। साथ ही सुविधाओं की स्थिति भी ठीक नहीं है। हवालात में औसत 20 से 25 बंदी प्रतिदिन पेशी पर न्यायालय में लाए जाते हैं, लेकिन अंदर बना शौचालय ठीक नहीं होने से बंदी कई बार हो-हल्ला करते हैं। बंदियों को हवालात के बाहर नहीं निकाला जा सकता।
इनका कहना है
हवालात के सामने दीवार बनाने को लेकर जिला कलक्टर को पत्र पे्रषित किया गया था। अधिकारियों को भी मामले से अवगत करवा दिया गया है। दीवार नहीं होने से बंदियों को उनके परिजन सीधे देख पाते हैं।
जितेन्द्र नावरिया, आरआई, पुलिस लाइन सीकर





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