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राजस्थान में बोर्ड परीक्षाओं के बीच फर्जीवाड़े का बड़ा खेल ! बिना परीक्षा के ही मिल रहे नंबर

रविन्द्र सिंह राठौड़, सीकर.

बिना पढ़े हर साल लाखों बच्चों को कला शिक्षा मूल्यांकन में नंबर ग्रेडिंग मिल रही हैं। सरकारी स्कूलों में कक्षा 5,8,10 वीं बोर्ड कक्षाओं में भी यह फर्जीवाड़े का खेल जारी है। कला शिक्षा को लेकर शिक्षा विभाग कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, स्कूलों में ना कला की किताबें और ना ही शिक्षक। इतना ही नहीं 10 वीं कक्षा तक अनिवार्य विषय होने के बाद भी परीक्षा नहीं होती है। प्रति वर्ष कक्षा 9,10 में करीब 11 लाख से अधिक नामांकन रहता है। लेकिन प्रदेश में केवल मात्र 3 लाख किताबे छापी है।


पुस्तकें छपना बंद
शिक्षा विभाग ने कक्षा 6,7,8 की अनिवार्य कला शिक्षा विषय की सृजन पुस्तक भी छापना बंद कर दिया। सत्र 2010- 11 में कक्षा 6 की 505098 लाख पुस्तकें, कक्षा 7 की 461831 लाख पुस्तकें, कक्षा 8 की 167951 पुस्तकें निशुल्क बांटी गई। सत्र 2011-12 में कक्षा 6 की 29166 तथा कक्षा 7 की 20924 पुस्तकें वितरण की गई। सत्र 2012- 13 से 2018 तक मुद्रण वितरण बंद रहा। इधर माध्यमिक स्तर की कला कुंजी पुस्तक भी छपना बंद हो गई। सत्र 2016 में कक्षा नौ की 25 हजार, 2017 में 42 हजार पुस्तकों का मुद्रण हुआ। कक्षा 10 में 22 लाख 6 हजार पुस्तकें मुद्रण हुई। लेकिन सत्र 2016 से 2018 तक सरकारी स्कूलों मं एक भी पुस्तक निशुल्क वितरण नहीं की गई। सत्र 2018-19 में मुद्रण पुर्णत बंद हो गया।


कला विषय का महत्व
बाल्यकाल से अगर बच्चो को कला की शिक्षा मिलती है, तो बच्चो को अपनी अभिव्यक्ति करने मे संतुष्टि व आनंद मिलता है। यह विषय बच्चो का सृजनात्मक, बौद्विक, भावात्मक, शारिरिक विकास करता है। उसके व्यक्तित्व को उभारता है। साथ ही उसे अच्छा नागरिक बनने मे सहयोग करता है। यह शिक्षा तनाव रहित शिक्षा के क्रम को व्यवस्थित करती है, और बच्चो को हिंसा से रोकती है।


निजी पुस्तक विक्रेताओं ने खरीदी
निजी पुस्तक विक्रेताओं ने सत्र 2016 में कक्षा नौ में कला शिक्षा विषय की 9293 पुस्तके विक्रय कर ली। सत्र 2017-18 में कक्षा नौ की 31131 पुस्तकें एवं कक्षा 10 की 54184 पुस्तकें विक्रय की गई। तथा सत्र 2018-19 में 9 वीं कक्षा में कला शिक्षा विषय की 42992 तथा कक्षा 10 की 49976 पुस्तकों की मांग की।


गलत टिप्पणी का नतीजा भुगत रहे बेरोजगार
प्रधानमंत्री के सामने कला विषय को लेकर उच्च शिक्षा अधिकारियों की गलत टिप्पणी का नतीजा प्रदेश के हजारों बेरोजगार युवा भुगत रहे है। इन अधिकारियों ने कला को अनिवार्य विषय मानने से साफ इंकार कर दिया। 4 नवंबर 1992 में कला शिक्षकों के पद खत्म कर दिए गए। इसके बाद प्रदेश में कला शिक्षा के पदों पर भर्ती नहीं हुई।


4.50 लाख की पुस्तकें बनी रद्दी
निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर ने सत्र 2016 से 2018-19 तक कक्षा 9, 10 की अनिवार्य कला शिक्षा की कला कुंज पुस्तकों की मांग नहीं की। जिसके चलते राजकीय स्कूलों में निशुल्क किताबे वितरण न होकर गोदाम में रद्दी बन गई। इन पुस्तकों की छपाई व लेखन कार्य में करीब 4.50 लाख रुपए का कुल खर्च आया। और अब छपना ही बंद हो गया।


सत्र कक्षा स्कूलों में नामांकन
2016 9,10 1128215
2017 9,10 1175418
2018-19 9,10 11 लाख



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