जैसलमेर. शादी समारोह से लेकर सामाजिक-धार्मिक आयोजनों में डीजे साउंड पर स्वर लहरियां किसे नहीं सुहाती, लेकिन अब डीजे वालों ने इसके लिए लाइसेंस नहीं लिया तो उनके लिए ये धुनें ‘बेसुरी’ हो जाएंगी। दरअसल, डीजे साउंड सिस्टम बजाने वालों को भी अब कॉपीराइट एक्ट के तहत संबंधित अधिकार प्राप्त कम्पनी से लाइसेंस लेना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ कॉपीराइट एक्ट के उल्लंघन का मामला दर्ज होगा। ऐसे में उनका डीजे साउंड का सामान भी जब्त किया जाएगा। गौरतलब है कि इस संबंध में अवैध कारोबार पर नियंत्रण के लिए राजस्थान में जयपुर की एक कम्पनी को अधिकृत किया गया है, जिसे लाइसेंस जारी करने को अधिकृत किया गया है। उधर, अवैध डीजे साउंड सिस्टम और कॉपीराइट का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में यह कम्पनी प्रदेश भर में पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई भी करेगी।
नहीं करते कोई परवाह
सीमावर्ती जैसलमेर जिले में अन्य स्थानों की भांति पिछले एक दशक के दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में डीजे साउंड का व्यवसाय तेजी से फल-फूल गया है। किसी भी तरह के मांगलिक, सामाजिक, धार्मिक यहां तक कि सरकारी कार्यक्रमों तक में डीजे साउंड के जरिए गाने बजाने का प्रचलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन ऐसा करने वालों में से शायद ही किसी के पास वैध लाइसेंस हो। इसी तरह से जिले भर में कम्प्यूटर के जरिए मोबाइल में फिल्में, गाने, रिंगटोन, वॉलपेपर्स आदि की डाउनलोडिंग का धंधा भी बेरोकटोक चल रहा है। जिनके पास प्राय: इस कार्य का लाइसेंस नहीं होता। जबकि केंद्र और राज्य सरकार के नियमानुसार फिल्म, गाने आदि की डाउनलोडिंग के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके तहत लाइसेंसधारक को नियमित रूप से सर्विस कर भी सरकार को जमा करवाना होता है।
पुलिस नहीं करती कार्रवाई
जैसलमेर जिले में अवैध डाउनलोडिंग अथवा कॉपीराइट एक्ट की अवहेलना के मामले में पुलिस वर्ष भर में बहुत कम संख्या में कार्रवाई करती है। बहुत प्रभावशाली शिकायत के बाद ही पुलिस लक्षित दुकानदारों को कानूनी शिकंजे में लिया करती है। और तो और पुलिस इन दिनों रात 10 बजे के बाद ध्वनि प्रदूषण करने वाले डीजे साउंड अथवा टेपरिकॉर्डर बजाने वालों को भी नहीं रोक रही। जबकि वर्तमान में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और केंद्रीय बोर्ड के साथ विश्वविद्यालयी परीक्षाएं भी संचालित हो रही हैं। पढऩे वाले विद्यार्थियों को इस तरह के शोर-शराबे से अध्ययन में खासी दिक्कत आती है।
यह है सरकारी फरमान
पिछले दिनों प्रदेश के गृह विभाग (ग्रुप-5) के अनुभागाधिकारी की ओर से आदेश जारी होने के बाद सीआइडी (सीबी) के पुलिस अधीक्षक (प्रशासन), जयपुर की ओर से सभी पुलिस अधीक्षकों को दिशा-निर्देश भेजे गए हैं। प्रदेश में मोबाइल, सीडी और डीजे की दुकानों पर गाने, रिंगटोन, वॉलपेपर आदि की अवैध डाउनलोडिंग और कॉपीराइट के उल्लंघन के मामलों में पुलिस सहयोग कर कार्रवाई करवाए। गौरतलब है कि कॉपीराइट के उल्लंघन पर संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की जाती है। कॉपीराइट के जानबूझकर उल्लंघन के लिए दुष्प्रेरणा को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। इसके लिए दोषी को न्यूनतम 6 माह का कारावास और 50 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया जा सकता है। वहीं अधिकतम सजा 3 साल की कैद और 2 लाख रुपए का अर्थदंड है।
यह है कॉपीराइट उल्लंघन
बिना इजाजत किसी और के स्वामित्व वाले गाने, फिल्म, रचना या अन्य किसी कृति को प्रकाशित करना व उसका लाभ लेना, सार्वजनिक जगहों पर अपने व्यावसायिक लाभ के लिए उपरोक्त गाने, फिल्म या रचना को दिखाने व सुनाने को कॉपीराइट एक्ट का उल्लंघन माना गया है।
फैक्ट फाइल -
-50 से ज्यादा डीजे साउंड सिस्टम हो रहे संचालित
-300 से ज्यादा मोबाइल डाउनलोडिंग की दुकानें
-18 पुलिस थाने जैसलमेर जिले में
करेंगे कार्रवाई
अवैध डाउनलोडिंग और कॉपीराइट के उल्लंघन प्रकरणों के संबंध में दिशा-निर्देश मिले हैं। जानकारी मिलने पर ऐसे मामलों में जिला पुलिस अवश्य कार्रवाई करेगी।
-डॉ. किरण कंग, जिला पुलिस अधीक्षक, जैसलमेर





No comments:
Post a Comment