बीकानेर. होली का पर्व बुधवार से मनाया जाएगा। दो दिनों तक पूरे शहर में होली की मस्ती छाई रहेगी। बुधवार रात को कई स्थानों पर होलिका दहन होगा और इससे पूर्व सुबह बहिने अपने भाइयों की दीर्घ आयु के लिए माला घोलने की परम्परा निभाएंगी। पंडित राजेन्द्र किराड़ू के अनुसार सुबह १०:४४ बजे से भद्राकाल आरंभ होगा जो रात ८:५९ बजे तक रहेगा। इस कारण होलिका दहन का समय रात ९:१५ से ११ बजे तक रहेगा। पूरे दिन भद्रयोग के कारण माला घोळने का मुहूर्त दोपहर ०१:३७ से 3.५९ के बीच श्रेष्ठ रहेगा। किराड़ू के अनुसार होली मंत्र-यंत्र सिद्धि का विशेष पर्व है। इसके चलते कई साधक होलिका दहन स्थल पर रात के समय मंत्र जाप करेंगे। इस दौरान नव विवाहित जोड़ों के ढुंढणा की परम्परा निभाई जाएगी।
रंगों से सराबोर रहेगा शहर
गुरुवार को धुलंडी मनाई जाएगी। सुबह पहले होली के रसिये एक दूसरे के होलिका की भभूत शरीर पर लगाएंगे। बाद में रंग-गुलाल की होली खेलेंगे। इस दिन पूरा शहर रंगों से सराबोर नजर आएगा। विभिन्न जातियों की गेर निकाली जाएगी। नत्थूसर गेट के बाहर तणी तोडऩे की रस्म होगी।
बिना फेरे लौटेगा दूल्हा!
धुलंडी के दिन भीतरी परकोटे में अनुठी बारात निकलेगी। इसमें दूल्हा होगा, बाराती होंगे, जगह-जगह बारात का स्वागत भी होगा, लेकिन दूल्हा बिना फेरे लिए ही वापस लौट जाएगा। मोहता चौक से धुलंडी पर दोपहर को हर्ष जाति के कुंवारे युवक की बारात निकाली जाएगी। यह दूल्हा विष्णु रूप धारण करेगा। मोहता चौक से शुरू होकर यह बारात दम्माणी चौक तक जाएगी। दम्माणी चौक में भी रस्में-रिवाज निभाए जाएंगे।
शुरू होगा गणगौर पूजन
धुलंडी से ही गणगौर पूजन शुरू हो जाएगा। बालिकाएं गवर का पूजन करेगी। होलिका दहन की मिट्टी से पिण्डोलिया बनाकर उससे पूजन शुरू किया जाएगा। यह एक पखवाड़े तक चलेगा।
सूरज रोटा व आस का व्रत २४ को
किराड़ू के अनुसार २४ मार्च को महिलाएं सूरज रोटा व आस माता का उपवास रखेगी। परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के लिए यह व्रत किया जाएगा।
शीतलाष्टमी २८ को
बच्चों की कुशलता के लिए शीतला अष्टमी का पर्व २८ मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन घरों में मटकियों पर गधर्भ की प्रतिकृतियां उकेर कर पूजन किया जाएगा। शीतला माता मंदिर में नमक व पानी चढ़ाया जाएगा। घरों में एक दिन पूर्व विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाएंगे, इनका सेवन दूसरे दिन शीतला अष्टमी के दिन किया जाएगा।





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