जोधपुर.
प्रदेश में मैनेंजाइटिस (दिमागी बुखार) के नकली टीके में डिफ्थीरिया (गलघोंटू) बीमारी का टीका भी सम्मिलित था। इसको लेकर औषधि नियंत्रण संगठन विभाग ने अलर्ट नोटिस जारी कर दिया है। ये इस टीके में मैनेक्ट्रा मेनिंगोकक्ल (गु्रप्स ए,सी,वाई एंड डब्ल्यू १३५) पोलीस्क्राइड डिफ्थीरिया टोक्सिड कंजुगेट वैक्सिन १ डोज वायल (0.5 एमएल) लॉट नं. (बैच नं.) यू५९९९एई, एम/डी 22 अगस्त 17, एक्सपायर्ड- 8 सितंबर 19 को विभाग ने नकली करार दिया है। औषधि नियंत्रण संगठन विभाग का कहना है कि बैच की संदेहास्पद औषधि असली बैच की औषधि से पैकिंग के आधार पर भिन्न है। जिससे विभाग ने काउंटरफिट यानी नकली की श्रेणी में लिया है।
जागरूक लोगों ने खाया धोखा-
सरकारी अस्पतालों में मैनेंजाइटिस व डिफ्थीरिया के टीके निशुल्क लगते हैं, लेकिन ज्यादातर जागरूक लोग बाहर से टीके खरीद कर लगवाते हैं। इस तरह के टीके पांच हजार रुपए में बिकते हैं। नकली टीके जोधपुर की फर्म से श्रीगंगानगर व सीकर जिले में सप्लाई हुए।
दर्द की व एंटीबायोटिक दवा भी अमानक-
विभाग ने तेलंगाना की मैसर्स येलुरी फोनोलेशन की बैच वाईएपी ७२०९६ एक्सपायर्ड अप्रेल २०१९ वाली एंटीबायोटिक दवा एमोक्सीलीन एंड पोटेशियम क्लेवुनेट ६२५, इसी बैच नं. वाईएपी ७२०८४ को अमानक करार दिया है। इसी तरह जयपुर की मैसर्स विवेक फार्माकेम की डाइक्लोफिनेक सोडियम टेबलेट आइपी ५० एमजी के बैच नं. डीएफटी१८००१ एक्सपायर्ड मार्च २०२० को भी अमानक करार दे दिया।
बच्चों की बीमारी अब बड़ों में भी-
गलघोंटू बीमारी सामान्य बच्चों में होती है। इसके लिए बाल्यकाल में सरकार नि:शुल्क टीकाकरण भी करती है। उसके बावजूद इस बीमारी के मरीज सामने आ रहे हैं। डिफ्थीरिया सामान्यत: बच्चों की बीमारी है, लेकिन अब बड़ों में भी आने लगी है। जिसमें २० से ४० आयु तक के मरीज भी सामने आ रहे हैं। बच्चे के जन्म से कुछ साल तक टीका लगता है। डिफ्थीरिया होने के बाद एंटी डिफ्थीरिया सीरम लगाया जाता है। जो महंगा आता है।
- डॉ. भारती सोलंकी, आचार्य, ईएनटी विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज
प्रदेश में अलर्ट जारी-
इन टीकों में दिमागी बुखार के साथ गलघोंटू का टीका भी था। इसको लेकर प्रदेश भर में अलर्ट जारी हो चुका है।
- राकेश वर्मा, सहायक औषधि नियंत्रक





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