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बिजनेसमेन मर्डर केस..पुलिस को नहीं मिला कोई क्लू, अब तक पकड़ से दूर बदमाश

अजमेर.

मनी एक्सचेंज व्यवसायी मनीष मूलचंदानी की हत्यारे अजमेर-जयपुर राजमार्ग और उससे लगते ग्रामीण इलाके से वाकिफ है। बदमाश वारदात अंजाम देने के बाद गेगल टोल प्लाजा से बचकर निकलने के लिए कच्ची राह से बिना किसी बाधा के फु र्र हो गए। पुलिस को वारदात में स्थानीय व्यक्ति की लिप्तता का भी संदेह है। पुलिस गिरोह के स्थानीय नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

आगरागेट जयपुर रोड पर दिनदहाड़े व्यवसायी मनीष मूलचंदानी की हत्या और लूट के मामले में पुलिस आलाधिकारियों की इतने दिन की मशक्कत के बाद भी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच सकी है। जहां पुलिस कप्तान कुंवर राष्ट्रदीप ने प्रकरण में अहम सुराग मिलने और गिरोह को ट्रेस करने का दावा किया है। उन्होंने दावा किया कि गिरोह पूर्व में भी लूट जैसी वारदातें अंजाम दे चुका है। वहीं अजमेर में लूट की वारदात स्थानीय मदद से अंजाम दी गई है। पुलिस गैंग के स्थानीय नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।

गेगल तक नजर आई कार

पुलिस पड़ताल में जहां गैंग शास्त्रीनगर के रास्ते शहर में दाखिल हुई तो वारदात के बाद गिरोह ने शहर से निकलने के लिए सीधा रास्ता अख्तिायर किया। वारदात के बाद नजर आई कार को पुलिस ने गेगल तक तो ट्रेक कर लिया लेकिन इसके बाद कार ने टोल क्रॉस नहीं किया। संभवत: कार गेगल टोल प्लाजा से पहले ऊंटड़ा, जाटली होते हुए जिले की बोर्डर पार गई। यह रास्ता बिना किसी स्थानीय मदद व जानकारी के पार नहीं हो सकता है।

दुबक कर बैठे बदमाश

पुलिस अधिकारियों की माने तो बदमाश लूट के इरादे से आए थे। व्यवसायी मनीष मूलचंदानी के अचानक विरोध और फायर की घटना से हत्या जैसा जघन्य अपराध का अंदाजा उन्हें भी नहीं था। गिरोह पूर्व में लूट जैसी वारदातें अंजाम दे चुका है लेकिन व्यापारी की हत्या के बाद गिरोह भी चुप्पी साध कर बैठ गया। पुलिस की टीमें गिरोह की परतें खंगालने में जुटी है।

एसपी कर रहे है मॉनेटरिंग
एसपी कुंवर राष्ट्रदीप मनीष मूलचंदानी हत्याकांड को स्वयं मॉनिटरिंग कर रहे है। प्रकरण में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर सरितासिंह, सहायक पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवा, वृत्ताधिकारी उत्तर जिनेन्द्र कुमार जैन समेत 8 थानाप्रभारी और साइबर की टीम जुटी हुई है। जिले के पुलिस थानों में अब तक 80 से ज्यादा आदतन बदमाशों को पूछताछ के लिए लाया जा चुका है। इस पड़ताल में पुलिस को अहम सुराग भी मिले है।

मैं स्वयं प्रकरण को थाने पर बैठकर मॉनेटरिंग कर रहा हूं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, वृत्ताधिकारी समेत 8 थानाप्रभारी, साइबर सेल जुटी हुई है। वारदात जिन्होंने अंजाम दी है वे कोई छोटे अपराधी नहीं है। पुलिस को बहुत कुछ मिला है। स्थानीय नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। पुलिस के प्रयास में कमी नहीं है। बंद जैसे कदम पुलिस अनुसंधान में मदद के बजाए बाधक साबित होंगे।

-कुंवर राष्ट्रदीप, पुलिस अधीक्षक



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