भीलवाड़ा।
मनरेगा में अब श्रमिकों के रोजगार पर संकट है। आचार संहिता से पहले पंचायतों ने मनरेगा के काम स्वीकृत नहीं कराए। एेसे में श्रमिक मनरेगा में काम मांगने जा रहे हैं लेकिन उन्हें मिल नहीं रहा है। अगले तीन माह और रोजगार नहीं मिलेगा क्योंकि आचार संहिता खत्म होने से पहले नए काम मंजूर नहीं किए जा सकते हैं। अभी जिले की २२ पंचायतों में नरेगा के काम पूरी तरह बंद है। अगले सात दिन में आंकड़ा लगभग ५० तक पहुंच जाएगा। पंचायत, पंचायत समिति व जिला परिषद अधिकारियों ने चुनाव से पहले तालमेल नहीं रखा, लिहाजा नए काम स्वीकृत नहीं किए है। एेसे में श्रमिक फॉर्म छह भी भरकर जमा करा रहे हैं लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा है।
प्रदेश में भीलवाड़ा छठे नम्बर पर
मनरेगा में प्रदेश में सर्वाधिक एक लाख से अधिक श्रमिकों को रोजागर देने वालों में प्रदेश में भीलवाड़ा छठे स्थान पर है। २ लाख से अधिक को रोजगार दे बाडमेर अव्वल है। अजमेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर के बाद भीलवाड़ा है, जहां १ लाख ७ हजार श्रमिक काम कर रहे है। प्रदेश की ९८९४ में से ४४६ पंचायतों में काम नहीं चल रहा है। ९४४८ पंचायतों में २० लाख ८२ हजार श्रमिक को काम मिल रहा है।
२२ पंचायतों में नहीं मिल रहा काम
जिले की ३८४ पंचायतों में से ३६२ में ही काम चल रहा है। इनमें १ लाख ७२९७ जनों को रोजगार दिया जा रहा है। कोटड़ी में १६, आसीन्द व जहाजपुर में २-२, बिजौलियां व माण्डलगढ़ में १-१ पंचायतों में कार्य स्वीकृत नहीं है। अगले माह से इनकी संख्या और बढेग़ी।
आगे क्या : श्रमिक के पास रसीद है तो मिलेगा भत्ता
मनेरगा में काम मांगने पर काम देने के नियम के साथ ही रोजगार नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रवाधान है। आवेदन के १५ दिन में रोजागर देने के नियम है। इन १५ दिन में रोजगार नहीं मिलने पर अगले १५ दिन तक मजदूरी दर का ५० प्रतिशत तथा उसके बाद भी काम न मिलने पर २५ प्रतिशत की दर से भत्ता दिया जाता है।
जरूरत पड़ी तो चुनाव आयोग से लेंगे अनुमति
आचार संहिता के चलते नए कार्य स्वीकृत नहीं होने से श्रमिकों के सामने परेशानी आ सकती है। जरूरत पड़ी तो नए कार्य के लिए चुनाव आयोग से स्वीकृति लेंगे लेकिन श्रमिकों को रोजागर देने का काम प्राथमिकता से होगा। कुछ पंचायतों में नए कार्य स्वीकृत नहीं हो सके थे।
महेश चन्द्र ओझा, एक्सईएन, मनेरगा जिला परिषद





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