अलवर.
मंदी के दौर में भी भूमाफिया सरकारी सिस्टम में घुसकर जमीनों में करोड़ों का खेल करने से नहीं चूक रहा है। अलवर यूआईटी की नई आवासीय कॉलोनी में भूमाफिया एक लाख रुपए लगाकर करोड़ों रुपए कमा रहे हैं और आम खरीददार को कई लाख रुपए महंगा भूखण्ड पड़ रहा है। यह पूरा खेल एक लाख रुपए में हो रहा है।
यूआईटी की नई आवासीय कॉलोनी शालीमार व विज्ञान नगर की पहली भूखण्ड नीलामी में भू माफिया के लोगों ने एक लाख रुपए जमा कराकर भूखण्ड खरीदने की प्रक्रिया में भाग लिया। मनमर्जी से भाव लगा दिए। इससे पहले आवासीय योजना में सीधे किसानों से अलग से विकसित भूखण्ड खरीद लिए। ताकि सरकारी भाव बढ़ाकर किसानों से खरीदे भूखण्डों को महंगे दामों में बेच सकें। यह सब करने में माफिया कामयाब भी हो रहा है। अलवर यूआईटी की विज्ञान नगर व शालीमार आवासीय योजना में किसी को उम्मीद नहीं थी कि सरकारी भाव 10 हजार रुपए से शुरू होकर 27 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर चले जाएंगे। पहली बोली में ही दोनों योजनाओं में 19 हजार रुपए से लेकर 27 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर के भावों में भूखण्ड बिक गए। जिसके कारण भूमाफिया की ओर से पहले से खरीदे जा चुके भूखण्ड भी महंगे हो गए। भू माफिया ने पहले ही किसानों से सीधे कई बीघा जमीन खरीद ली थी।
यह सबूत, एक लाख रुपए छोड़ गए
भूमाफिया के सक्रिय होने का यह सबसे बड़ा सबूत है कि भूखण्ड नीलामी में भाग लेने वाले कई खरीददार ऊंचे दाम लगाकर अब पैसे जमा कराने नहीं आ रहे हैं। जबकि नीलामी में भाग लेने के लिए एक लाख रुपए अमानत राशि के जमा कराने होते हैं। मतलब उनको एक लाख रुपए छोडऩे की चिंता नहीं है। उनका मकसद यही था कि भूखण्डों की बिक्री के भाव बढ़ जाएं। ताकि बाद में खुद के महंगे भूखण्ड बेचकर मोटी कमाई कर सकें।
6 खरीददार नहीं आए
जनवरी माह में कुल 22 भूखण्ड इन दोनों योजनाओं में बिके। जिसमें से 6 भूखण्डों के खरीददार अभी पैसा जमा कराने नहीं आए हैं। जबकि बोली लगे डेढ़ माह पूरा हो चुका है। नियमानुसार राशि सात दिन में जमा करानी होती है। अभी तक 16 खरीदार पैसा जमा करा चुके हैं। यह सही है कि इन दोनों योजनाओं में भूखण्ड खरीदने वाले करीब 400 से अधिक लोग पहुंचे थे।
योजना में भूखण्ड संख्या
विज्ञान नगर 69 हैक्टेयर जमीन, आवासीय भूखण्ड 1210, व्यावसायिक भूखण्ड 668
शालीमार 85 हैक्टेयर, आवासीय भूखण्ड 1437, व्यावसायिक भूखण्ड 784
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जमा करा रहे हैं पैसा
भूखण्ड घर की जरूरत वाले परिवारों ने ही खरीदे हैं। 22 में से 16 खरीददारों ने पैसे जमा करा दिए हैं। कुछेक को यह हो सकता है कि सूचना देरी से पहुंची हो। ऐसा नहीं है कि अधिकतर भूखण्ड भूमाफिया ने खरीदे हैं। कई सालों के बाद कॉलोनी आई है तो मांग बढ़ी है।
एके धींगड़ा, एक्सईएन, यूआईटी अलवर





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