भीलवाड़ा।
लैप्स होने वाली १०० करोड़ की क्रेडिट को बचाने में जुटे कपड़ा व विविंग उद्यमियों को सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम जीएसटी पॉलिसी विंग के आदेश से हड़कंप मच गया है। कपड़ा व्यापार को सरकार ने अगस्त 2018 से इनपुट टैक्स क्रेडिट देने की घोषणा की थी। इसमें शर्त थी कि 1 जुलाई 2017 से 31 जुलाई 2018 तक की १०० करोड़ की क्रेेडिट कपड़ा व्यापारियों को लैप्स करनी होगी। व्यापारियों ने लैप्स होने वाली १०० करोड़ की क्रेडिट को उपयोग में लिया जाए, इसलिए सरकार को नोटिफिकेशन में लैप्स शब्द हटाने की मांग की थी। भीलवाड़ा सांसद से लेकर वित्त मंत्री और कपड़ा मंत्री ने आश्वासन दिया था, लेकिन लैप्स शब्द नहीं हटा। आखिर में व्यापारियों ने प्रतिवेदन भेजे। इस मामले में सीजीएसटी विभाग के अधिकारियों ने भी अपनी और से भेजे जाने वाले सुझाव में राहत देने की सिफारिश की थी। ऐसे में सरकार ने 28 मार्च को सर्कुलर जारी कर २४ प्रतिशत ब्याज चुकाने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया।
आदेश में कहा गया है कि जिन्होंने अगस्त में लैप्स करके रिटर्न नहीं भरा है तो उन्हें २४ प्रतिशत ब्याज देना होगा। हालांकि इनपुट टैक्स क्रेडिट तो मिलेगा, लेकिन पहले व्यापारियों को ब्याज देना होगा। सरकार के इस आदेश से वस्त्रनगरी के ५०० से अधिक उद्यमी व व्यापारियों में हड़कम्प मचा हुआ है।





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