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सिलीकोसिस लील रही नौजवानियां...

सिलीकोसिस लील रही नौजवानियां...
-गांव कोटड़ा में 50 साल से ज्यादा नही जीते पुरुष
-अवैध खनन क्षेत्र बना जानलेवा
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. जिले के झिरनियां, बिलोनिया व कोटड़ा क्षेत्र में अवैध खनन व गलत खानपान शैली व दूषित पानी के सेवन से गांव के युवा पूरी जिंदगी भी नही जी पाते है। गांव कोटड़ा में पुरुष पचास साल से अधिक की आयु नहीं जी पाते। करीब 100 घरों की इस बस्ती में करीब 30 महिलाएं विधवा का जीवन जीने पर मजबूर है। वही नई पीढ़ी में कई बालक बालिकाएं शारीरिक विकार व विकलांगता के जीवन से रुबरु हो रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि गंाव में अधिकतर पुरुषों के पास आजीविका का साधन सिर्फ खनन कार्य ही है। बचपन से पचास साल की आयु आते आते उसे कई बीमारियां आदि घेर लेती है। वही महिलाएं शादी के बाद गांव में आती है इस कारण बीमारी का असर उन पर करीब 20 साल बाद शुरु होता है। हालाकि गांव वाले पेयजल समस्या के कारण दूषित पानी पीने की मजबूरी से पानी के विकार को भी कारण मानते है।
-यह बताया ग्रामीणों ने
गांव में 50 वर्षीय मांगीलाल ने बताया कि उसका 25 वर्षीय पुत्र, भतीजा, छोटा भाई, जीजा आदि युवा अवस्था में ही शांत हो गए। कई बार विवाह के कुछ समय बाद ही युवक मौत के मूूंह में चले जाते है पीछे जवान पत्नी विधवा हो जाती है तो बड़ा दुख होता है। गंाव के ही 48 वर्षीय औकार लाल ने बताया कि उनके साथ के सभी लोग खत्म हो चुके है। उन्होने बताया कि उनके करीब दो दर्जन गंाव के साथी थे लेकिन धीरे धीरे सब शांत हो गए। ग्रामीण प्रीतम सिंह ने बताया कि गंाव मेंं युवा दिनभर भूखे प्यासे पत्थर कूटते रहते है। गांव में पानी दूषित व खारा मिलता है इस कारण भी युवाओं का शरीर खोखला हो रहा है।
-यह हो सकता है कारण
झिरनियां क्षेत्र में अवैध खनन बड़े पैमाने पर होता है। इस काम में गांव कोटड़ा के युवा भी शामिल होते है तो कई युवा दूसरों की खदानों पर काम करते है। इस दौरान पत्थर व धूल के कण उनके फेफड़े में जमते रहते है। अधिकतर भूखे-प्यासे रहकर अल सुबह से देर शाम तक काम में लगे रहना फिर रात को अवैध शराब का सहारा लेना इनकी दिनचर्या बन जाती है। असुरक्षित माहौल में हाड़तोड़ मेहनत, खराब खानपान, सेहत के प्रति लापरवाही व समय पर इलाज नही लेने आदि कारण से युवा असमय मौत के मूंह में चले जाते है। इस क्षेत्र में खारा व दूषित पानी मिलता है। हेण्डपम्प व ट्यूब वेल का पानी भी पीने योग्य नही होता है।
-सिलीकोसिस शिविर सिर्फ लीगल क्षेत्र में
खदानों में होने वाली सिलीकोसिस बीमारी के शिविर चिकित्सा विभाग, खनन विभाग आदि केवल पंजीकृत खदान क्षेत्र में ही लगाए जाते है, लेकिन अवैध खनन में ऐसे शिविर नही होने से युवाओं का समय पर इलाज नही हो पाता है व यह जानलेवा घातक बीमारी उनकों धीरे धीरे मौत के आगोश में ले लेती है।
-गांव में इन पुरुषों के जीवन का हुआ अंत
गांव कोटड़ा में पचास साल से कम आयु में अपना जीवन गंवाने वाले पुरुषों में पप्पू लाल, हर्ष सिंह, गौरीलाल, चतरा, गजानंद, भावङ्क्षसह, छीतर, काशीराम, हरलाल, भाव सिंह, जगदीश, लक्ष्मण, मांगीलाल, किशन, रघुनाथ, छीतरलाल, दल सिंह, सीताराम, रामसिंह व पन्नालाल सहित कई लोग शामिल है।
-गांव में इन महिलाओं का सुहाग हुआ खत्म
गांव कोटड़ा में पचास साल से कम आयु में अपना जीवन गंवाने वाले पुरुषों की जीवन संगनियां इन दिनो विधवा का जीवन जीने पर मजबूर है। इसमें गीता बाई, कमला बाई, तशली बाई, सोना बाई, गूंजा बाई, भूरी बाई, कालीबाई, गीता बाई, गिरजू बाई, गूंजा बाई, संतोष, सजना बाई, बाती बाई, लीलाबाई, अन्ना बाई, मीरा बाई, दाखा बाई, बामनी बाई, नंदू बाई, स्वरुपी बाई व दाखा बाई सहित अन्य विधवा गांव में रह रही है।
-यह झेल रहे विकलंागता का अभिशॉप
गंाव में संजू बाई, बल्लूबाई, निशा, राधेश्याम, गुड्डी बाई, कर्मा व वकील आदि विकलांग है।
-जान लेवा हो जाता है सिलीकोसिस
इस सम्बंध में राजकीय एसआरजी चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आर.डी. माथुर ने बताया कि धूल व पत्थरों के बीच खनन आदि कार्य करने वाले लोगों में क्षय रोग, निमोनिया, दमा, खांसी व संास की अन्य बीमारियों के अलावा घातक सिलीकोसिस बीमारी पैदा हो जाती है इस बीमारी में फेफेड़े खराब हो जाते है इससे मरीज की मौत हो जाती है। इस बीमारी से सिर्फ बचाव ही उपचार है।
-शिविरो में सामने आते है मरीज
जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. साजिद खान ने बताया कि चिकित्सा विभाग की ओर से समय समय पर जिले के कई क्षेत्रों में शिविर आयोजित किए जाते है। इस दौरान खनिज विभाग की ओर से पंजीकृत खदानों के मजदूरों के साथ शिविर में आने वाले सभी मजदूरों की जांच की जाती है। सिलीकोसिस के लक्षण सामने आने पर मेडिकल बोर्ड से प्रमाणित करा कर उसे सरकार की ओर से एक लाख रुपए की सहायता राशि भी प्रदान की जाती है।



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