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जीवनरूपी जल में बीमारियों का बुना जा रहा जाल,शहरी क्षेत्र में जलाशयों की सफाई नहीं

जैसलमेर.जल ही जीवन है, इस पंक्ति को ध्येय वाक्य बनाने वाले स्वयं शहरी जलप्रदाय विभाग के लिए ही इसके कोई मायने नहीं हैं। तभी जैसलमेर जिला मुख्यालय पर हजारों लोगों को पीने का जो पानी आपूर्ति किया जा रहा है, उसकी स्वच्छता सवालों के घेरे में हैं। नगरपरिषद जैसलमेर के अंतर्गत आने वाली शहरी जलापूर्ति प्रणाली के तहत बने भूतल जलाशयों की सफाई हुए करीब डेढ़ साल बीत गया, लेकिन जिम्मेदारों को उनकी सुध लेने की फुर्सत नहीं है। पत्रिका टीम ने जब इन जलाशयों का मुआयना किया तो वे बाहर से जर्जर और भीतर कचरे से भरे नजर आए। इन जलाशयों की सफाई में ढिलाई से शहर में स्वच्छ जलापूर्ति के दावों पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है और जलजनित बीमारियों से आमजन का स्वास्थ्य खतरे की जद में है। जलदायकर्मियों की अनदेखी से टंकियों की नियमानुसार सफाई नहीं होने के चलते जलदाय परिसर में भी गंदगी का आलम नजर आता है। ऐसे में दूषित जलापूर्ति से इनकार नहीं किया जा सकता। जलाशयों के तल में चार से छह फीट तक ब्लीचिंग पाउडर जमा है।

यह है हालात
पत्रिका टीम ने जैसलमेर शहर के अधिकांश हिस्से को जलापूर्ति करने वाले सूली डूंगर, बीपी टैंक और गांधी कॉलोनी हिलॉक के भूतल जलाशयों की पड़ताल की तो निराशाजनक हालात नजर आए। इन जलाशयों पर अंतिम बार सफाई साल 2017 के आखिर में करवाई गई थी। ये जलाशय आवश्यक मरम्मत कार्य के अभाव में जर्जर हो रहे हैं और उन पर काई जमी नजर आती है। जलाशयों के भीतर धूल व अन्य कचरा नजर आया। जानकारी के मुताबिक पेयजल टंकियों की नियमानुसार हर छह माह में सफाई होनी चाहिए। जहां भूतल जलाशयों की सफाई हुए करीब डेढ़ साल का समय व्यतीत हो चुका है वहीं उच्च जलाशयों की सुध लिए तो कई-कई साल बीत गए हैं। पत्रिका टीम ने देखा कि पानी की टंकियों में काई व कचरा तैर रहा है और आसपास का क्षेत्र गंदगी से पूर्ण है। जलाशयों के के चारों ओर झाडिय़ां उगी हुई हैं। बीपी टैंक के पम्प हाउस में नाले का गंदा पानी भरा होने से वातावरण दुर्गंधमय बना हुआ है।
हादसे का शिकार न हो
शहर के सूली डूंगर में बनी टंकियों की स्थिति बदहाल व जर्जर है। कई साल पहले यहां मरुप्रदेश की लोकसंस्कृति से संबंधित चित्रों का अंकन करवाया गया था। तत्कालीन कलक्टर केके पाठक की पहल पर वाद्य यंत्र बजाते कलाकार, सूर्यास्त, पणिहारिनों, रेगिस्तान के जहाज के चित्रों का अंकन करवाकर इसे आकर्षक बनाया गया था। इस चित्रकारी के अब महज अवशेष ही रह गए हैं। सोनार दुर्ग में स्थित पानी की टंकी को अब तक दुरुस्त नहीं करवाया जा सका है। गौरतलब है कि शहर के विभिन्न स्थानों पर एक दर्जन से अधिक उच्च जलाशय बने हैं। इनमें से अधिकांश की सफाई हुए कई-कई साल हो चुके हैं।

फैक्ट फाइल -
- 12 एमएल जल जैसलमेर की मांग
- 35 वार्ड हैं जैसलमेर परिषद क्षेत्र में
- 06 साल से जलापूॢत व्यवस्था नगरपरिषद के जिम्मे

टेंडर के लिए अनुमति मांगी है
जलाशयों की सफाई के लिए टेंडर लगाए जाने हैं। वर्तमान में आचार संहिता लागू होने की वजह से इसके लिए जिला कलक्टर से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलने के तुरंत बाद टेंडर करवाए जाकर साफ-सफाई का कार्य करवाया जाएगा।
- देवीलाल भील, सहायक अभियंता जलदाय, नगरपरिषद जैसलमेर



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