झुंझुनूं. गर्मी का मौसम शुरू होते ही शहर व गांवों में फिल्टर पानी के नाम पर दूषित पानी बेचने वाले कारोबारी सक्रिय हो गए हैं। शहर में बोतल बंद पानी के साथ-साथ कैन में पानी उपलब्ध होने लगा है। शहरवासियों को कैन के माध्यम से फिल्टर पानी उपलब्ध कराने का लाइसेंस सात लोगों के ही पास है। जबकि यहां सैकड़ों की संख्या में फिल्टर पानी कारोबारी घरों में और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में पानी पहुंचाने का काम कर रहे हैं। बिना लाइसेंस के चल रहा धंधा फल-फूल रहा है और लोगों की सेहत बिगाड़ रहा है। जांच नहीं होने के चलते लोग पूरे गर्मी के सीजन के अलावा विवाह, पार्टियों आदि में आंख बंद कर फिल्टर पानी के नाम पर इस पानी का सेवन हो रहा है। यह दूषित पानी लोगों की सेहत को धीरे-धीरे खराब कर रहा है। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं होती है।
यूं ठगते हैं
शहर व गांवों में बिकने वाले पाउच या बोतल पर आइएसआइ मार्का नहीं है तो उस कारोबारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पानी का व्यापार करने वाले व्यापारी इनपर ड्रिंकिंग वॉटर लिखने की बजाए बारिक अक्षरों में फॉर कुकिंग परपच लिख देते हैं यानि खाना बनाने के काम में उपयोग लेना। यह पैकिंग कब हुई यह भी पता नहीं होता है क्योंकि इनपर मन्यूफैक्चिरंग डेट नहीं होने से ग्राहक भ्रमित रहता है और पानी खरीद लेता है। शहरों व गांवों की दुकानों पर पानी को उचित तापमान में रखना होता है लेकिन अधिकांश दुकानों के बाहर धूप में पानी रखा रहता है।
झुंझुनूं जिले में रोजाना लाखों का कारोबार
झुंझुनूं शहर अन्य कस्बों व गांवों में घरों में के अलावा विवाह, पार्टियों व अन्य कार्यक्रमों में आजकल फिल्टर पानी ही पहुंचना शुरू हो गया है। जिले में 20 लीटर केन का रोजाना का 20 से 25 लाख तक का हो जाता है। ऐसे में एक महीने में जनता पानी पर हर महीने करोड़ों रुपए खर्च कर रही है।
पीलिया की चपेट में आ रहे हैं..
बिना जांच-पड़ताल के पी रहे फिल्टर पानी सही है या नहीं इसकी जानकारी लोगों को है ही नहीं। ज्यादातर फिल्टर पानी को ठंडा कर लोगों के घरों तक पहुंचा रहे हैं।बोतल बंद और पाउच में रखे पानी को ज्यादा दिन तक नहीं रखना चाहिए। निर्धारित समय के बाद पानी खराब हो जाता है और इसके सेवन से पीलिया, टाइफाइड, हडिडयों की बीमारी की चपेट में आते हैं।
30 रुपए प्रति कैन लिए जा रहे हैं...
शहर में गर्मियों का सीजन शुरू होती ही प्रति कैन 20 से 30 रुपए लिए जा रहे हैं। एक कैन 20 लीटर का होता है। वर्तमान शहरों की 60 फीसदी घर फिल्टर पानी का ही सेवन कर रहे हैं।
इनका कहना है...
सात फिल्टर पानी प्लांट के ही लाइसेंस हैं। अधिकांश अवैध रूप से चल रहे हैं। गर्मी की शुरुआत हुई है, ऐसे में अवैध रूप से चल रहे फिल्टर वॉटर प्लांटों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-महेश, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, सीएमएचओ झुंझुनूं





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