बीकानेर. बीकानेर में नाटकों का महाकुंभ गुरुवार से शुरू होगा। पहले दिन बापू और द व्हाइट साड़ी नाटक का मंचित होगा। फेस्टिवल १७ मार्च तक आयोजित किया जाएगा। पहले दिन अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिनाम कलाकार नत्थूखान सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे। डॉ नन्दकिशोर आचार्य को समर्पित बीकानेर थियेटर फेस्टिवल का आगाज गुरुवार को शाम पांच बजे रवींद्र रंगमंच में होगा। समारोह के अगले पांच दिन शहर थिएटर के तमाम रंगों में डूबा रहेगा। फेस्टिवल का विधिवत शुभारम्भ राजेन्द्र गुप्ता, डॉ. नन्दकिशोर आचार्य, संजना कपूर, जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम, टीएम लालाणी, हंसराज डागा और मधुसूदन गुप्ता करेंगे। आयोजन का हिस्सा बनने प्रसिद्ध रंगकर्मी और थिएटर ग्रुप जुनून से जुड़ी संजना कपूर और सम्भाजी भगत बुधवार को बीकानेर पहुंचे।
कला जगत में रंगमंच ही श्रेष्ठ: संजना कपूर
बीकानेर. रंग अभिनेत्री संजना कपूर ने कहा है कि अभिनय का सबसे सशक्त माध्यम हमेशा ही रंगमंच ही रहा है। कला जगत में रंगमंच ही श्रेष्ठ है। बुधवार को बीकानेर पहुंची संजना कपूर ने राजस्थान पत्रिका से बातचीत में कहा कि अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर तो रंगमंच को लेकर काफी सशक्त काम हो रहा है। लेकिन हिन्दी व राजस्थानी भाषा के नाटकों के लिए कलाकारों को आगे लाने का प्रयास करना होगा। रंगमंच के मंजे हुए कलाकार फिल्मी पर्दे पर दमदार छाप छोड़ रहे हैं, मगर उन कलाकारों को रंगमंच को सदैव याद रखना होगा। समय मिलने पर रंगमंच पर अभिनय जरूर करें। कपूर ने बताया कि आज महानगरों में तो लोग टिकट लेकर ही नाटक देखते हैं, लेकिन राजस्थान व बीकानेर सरीखे क्षेत्रों में अभी भी इसके लिए जागरुकता की दरकार है। उन्होंने कहा कि उनकी संस्थान जुनून के माध्यम से रंगकर्म के क्षेत्र में नवाचार किया जा रहा है। खासकर दर्शकों और कलाकारों के बीच में सामंजस्य बनाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बीकानेर में कला का माहौल अच्छा
चौथी बार बीकानेर आई संजना कपूर ने बताया कि यहां काफी अच्छा माहौल है। संस्थाएं व कलाकार मेहनत कर रहे हैं। लोग काफी अच्छे हैं, सहयोग की भावना रखते हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर टाउन हाल, रेलवे प्रेक्षागृह व रविन्द्र रंगमंच सरीखे मंच भी है, यहां पर होने वाले सांस्कृति कार्यक्रमों में लोगों को भागीदारी निभानी चाहिए। थियेटर फेस्टिवल में वे रंगकर्मियों से चर्चा भी करेगी।
ना वेब से, ना पर्दे से डर
कपूर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भले ही आज फिल्मी पर्दे के साथ ही वेब सीरीज भी चल रहा है, लेकिन इससे रंगमंच के दर्शकों पर कोई असर नहीं है। यह भी सही है कि वेब सीरीज तो रंगमंच के कलाकारों को यदि मौका मिलता है, तो अच्छा और बेहतर काम करना चाहिए। महानगरों में नाटकों को दर्शकों मिल रहे हैं।





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