कालूलाल लौहार. चित्तौडग़ढ़. सरकार ने उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यालयों में मिड डे मील में दिया जाना वाला भोजन बच्चों की सेहत पोषण का आधार बने इसके लिए उसके मीनू में निरन्तर बदलाव किए है। बच्चों के पोषण में फल अहम माने जाने से सप्ताह में एक दिन सोमवार को मौसमी फल भी बच्चों का देने का प्रावधान है। सरकार के ये प्रावधान हकीकत के धरातल पर कागजों में सिमट रहे है। सोमवार के दिन भी बच्चों को कई जगह फल नहीं मिल रहे है तो मीनू चार्ट में भी शिक्षक मनमर्जी से बदलाव कर रहे है। पत्रिका टीम फल वितरण के लिए तय दिवस को कई स्कूलों में पहुंची तो हकीकत सामने आ गई। जहां फल नहीं दिए जा रहे थे वहां शिक्षकों ने बचाव में अजीब तर्क दिए। किसी ने कहा कि कल देंगे तो किसी ने कहा कि पिछले सप्ताह ही बच्चों को दो बार फल खिला दिए थे।
मिड-डे-मिल के तहत अलग-अलग दिन अलग-अलग मीनू के आधार पर बच्चों को भोजन भी दिया जाता है। अधिकारियों नेे जिले में प्रत्येक सोमवार को बच्चों को एक मौसमी फल देने प्रावधान किया हुआ है। पत्रिका टीम ने कई स्कूलों में बच्चों से फल खिलाने के बारे में पूछा तो उन्होंने ऐसा होने से मना कर दिया। राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल कीर खेड़ा, भोई ख्ेाड़ा, माध्यमिक स्कूल सेमलपुरा, प्राथमिक स्कूल बीडघास, राउमावि ऐराल, प्राथमिक स्कूल राजपुरिया, राउमावि गढ़ पाछली नेतावल में मिड-डे-मिल व्यवस्था के हाल देखे।
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केस-१- बच्चों को कल लाकर देंगे फल
समय: १:१७ स्थान: राजकीय प्राथमिक विद्यालय बीडघास
स्कूल में बच्चे खाना खा कर बर्तन साफ कर रहे थे।बच्चों से फल देने के बारे में पूछा तो उन्होंने मना कर दिया। इस मामले में प्रधानाध्यापिका से पूछा तो उन्होंने कहा कि कल रविवार था सुबह जल्दी आना पड़ता है इसलिए मंगलवार को बच्चों से फल खिलाएंगे।
केंस-२: पिछले सप्ताह दो बार खिला दिए थे
समय: १:३५ स्थान: राउमावि ऐराल
यहां कक्षा ८ तक के बच्चे खाना खाने के बाद बाहर खेल रहे थे।बच्चों से फल के बारे में पूछा तो उन्होंने फल देने से मना कर दिया। मिड-डे- मिल प्रभारी से फल देने के बारे में पूछा तो बोल पिछले सप्ताह दो बार दे दिए थे।यहां पर मिड-मिल का खाना भी बाहर बनाने पर पूछा तो उन्होंने कहा कि कमरें की कमी होने से बाहर बना रहे है।
केस-३: मैडम ट्रेनिंग में होने से फल लेकर नहीं आए
समय: १:५० स्थान: स्कूल एक पंचायत सहायक मंजू शर्मा के भरोसे चल रहा था। पंचायत सहायक से बच्चों को फल देने के लिए पूछा तो उन्होंने कहा कि आज मैडम ट्रनिंग में गए इसलिए बच्चों के लिए फल लेकर नहीं आए है।
केस-४ : फल तो शनिवार को ही दे दिए
समय: २:३५ स्थान: राउमावि नेतावलगढ़ पाछली
स्कूल में एक कक्षा में जाकर बच्चों से फल देने के बारे में पूछा तो बच्चों ने मना कर दिया। इस बारे में मिड-डे-मील प्रभारी से पूछा तो उन्होंने शनिवार को फल देने की बात की। यहां पर मीनू के आधार पर भी खाना नहीं बना था।इस पर उन्होंने कहा यहां पर नामांकन अधिक होने से रोटी-सब्जी बनाने में समय अधिक लग जाता है।
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मीनू के आधार पर नहीं बन रहा खाना
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अनुसार सोमवार को रोटी-सब्जी व फल देना तय है, लेकिन कई स्कूलों में इसकी पालना नहीं की जा रही है। ऐराल स्कूल में दाल-रोटी बनाई वहीं गढ़पाछली नेतावल स्कूल में दाल ढोकला बनाए गए। यहां पर मानदेय पर एक चर्तुथश्रेणी कर्मचारी को रख रखा है फिर भी बच्चे झाडू लगाते हुए दिखे।
पता चला तो पहुंच कर लगा दी सीएल
राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल राजपुरिया में प्रधानाध्यपिका पूजा वैष्णव व अध्यापक प्रमोद खिंची दोनों मौजूद नहीं थे। वहां मौजूद पंचायत सहायक से दोनों के बारे में पूछने पर प्रधानाध्यापिका किसी ट्रेनिंग में जाने व अध्यापक के बैंक काम होने से नहीं आना बताया है। सूचना पर ऐराल पीईईओ मौके पर पहुंचे और प्रधानाध्यपक के सीएल लगाई। अध्यापक पंचायत सहायक को फोन कर सीएल लगाने के लिए कहने लगे।
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बच्चों के लिए क्यों जरुरी है फल
चिकित्सकों के अनुसार बच्चों की सेहत व पोषण के लिए फल बहुत जरुरी होते है। फलों में विभिन्न प्रकार प्रोटीन सहित ऐसे तत्व पाए जाते है जो बढ़ती उम्र के बच्चों की सेहत सुरक्षा में मददगार होते है। सरकार ने भी इसी उद्देश्य से सप्ताह में एक दिन फल देना तय किया हुआ है।
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बच्चों को सोमवार को फल देने और मीनू के आधार पर खाना खिलाना है। ऐसा क्यों नहीं हो रहा इस बारे में जांच कराकर उचित कार्रवाई करेंगे।
कल्याणी दीक्षित, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी चित्तौडग़ढ़
मिड-डे-मिल में नियमों की पालना नहीं हो रही है तो जांच कराएंगे। लापरवाह बरतने वाले शिक्षक पर कार्रवाई करेंगे।
राकेशकुमार शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक चित्तौडग़ढ़





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