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इसलिए ठगे जा रहे हैं लोग, देखें क्या है मामला

सीकर.नक्कालों पर कमजोर नकेल के चलते यहां बाजार में नकली सामान की भरमार हो गई है। जूते चप्पल से लेकर इलेक्ट्रोनिक सामान और गाडि़यों में डालने का ऑयल बनाने की नकली फैक्ट्री पकडऩे में आने के बाद भी जिम्मेदारों की आंख नहीं खुली है। एेसे में छोटी दुकानों से लेकर प्रमुख बाजारों में भी नकली सामान बेचा जा रहा है। ब्रांड का हू-ब-हू लेबल लगा होने के कारण ग्राहक भी झांसे में आ जाता है। कार्रवाई की स्थिति देखे तो संबंधित कंपनी की शिकायत पर ही आज तक कार्रवाई की गई है। इसमें भी पुलिस की भूमिका मामला दर्ज कर चालान पेश करने तक की ही रही है। बाजार में बेचे गए नकली सामान को बरामद करने का कभी कोई प्रयास नहीं किया गया।
सस्ते के झांसे में आते हैं ग्राहक
ब्रांडेट कंपनियों के नकली सामान की दुकानदार कीमत कम रखते हैं। एेसे में ग्राहक सस्ते के झांसे में आ जाते हैं। सामान्यत: देखकर ग्राहक असली नकली की पहचान नहीं कर सकता। इसका उपयोग करने के बाद ही पता चलता है। सामान्यत: ग्राहक इसकी शिकायत भी नहीं करता। बिक्री पर प्रभाव पडऩे पर संबंधित कंपनी ही इसकी शिकायत पुलिस को देती है। अब तक के मामलों की स्थिति देखे तो संबंधित कंपनी ने जांच कर पुलिस को ठिकाना तक बताया है। प्रमुख मामलों पर नजरनकली ऑयल फैक्ट्री शहर के औद्योगिक क्षेत्र में पुलिस ने इसी वर्ष जनवरी माह में संबंधित कंपनी की शिकायत पर नकली ऑयल बनाने की फैक्ट्री पकड़ी थी। पुलिस ने आरोपित को मौके पर ही गिरफ्तार कर ११ ड्रमों में भरा करीब तीन सौ लीटर नकली ऑयल और इसको बनाने का सामान जब्त किया था। लेकिन पुलिस मामले की तह में नहीं जा पाई। जबकि यह फैक्ट्री तीन वर्ष से संचालित चल रही थी। राधाकिशनुपरा में बन रहा था नकली गुटका शहर के राधाकिशनपुरा के एक मकान में नामी कंपनियों के नाम का नकली गुटका बनाया जा रहा था। कंपनी की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब २५ लाख रुपए का नकली गुटका व उसे बनाने का सामान जब्त किया था। कार्रवाई के दौरान सामने आया था कि नकली गुटका बनाने के लिए पैरासिक नाम का केमिकल काम में लिया जा रहा था। पुलिस ने शहर के स्टेशन रोड स्थित मॉल पर छाप मारकर भारी मात्रा में नकली जुते चप्पल बरामद किए गए थे। उस दौरान पुलिस ने चार दुकानों पर कार्रवाई की थी। लेकिन इसके बाद भी यह कारोबार थमा नहीं है।

नकली सामान के बारे में संबंधित कंपनी की शिकायत पर ही कार्रवाई होती है। ट्रेडमार्क की पहचान कंपनी के तय प्रतिनिधि ही कर सकते हैं।
गिरधारीलाल शर्मा पुलिस उप अधीक्षक, सीकर शहर



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