लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद
कॉन्ट्रेक्ट केरिज बसों में ट्रेवल्स कंपनियों द्वारा नियम विरुद्ध बस स्टॉपेज से सवारियां बिठा रहे हैं, तो कई बसें लगेज भी लाद रहे हैं। इससे न सिर्फ परिवहन महकमे को टैक्स की चपत लग रही है, बल्कि रोडवेज बसों के रूट पर आगे पीछे चलने से राज्य पथ परिवहन निगम को भी प्रतिमाह पांच पांच लाख की चपत लग रही है। कानून कायदे के विरुद्ध चल रही बसों में इमरजेंसी खिडक़ी तक नहीं है। गंभीर धांधली को लेकर रोडवेज ने परिवहन विभाग से लेकर जिला कलक्टर तक को शिकायत कर दी, फिर भी ट्रेवल्स संचालकों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं पाई। इसके चलते गत वर्ष श्रीनाथ ट्रेवल्स बसों की धांधली पकड़ी गई, तो अब एसएस बुंदीवाल ट्रेवल्स की कारस्तानी उजागर हुई।
श्रीनाथजी ट्रेवल्स की बसों का मालिक हिन्दुस्तान जिंक को बता 30 लाख का परिवहन टैक्स चोरी का मामला उजागर होने के बाद फरवरी-मार्च 2017 में परिवहन विभाग ने परमिट नियमों की अवहेलना पर कई बसें पकड़ी और चालान भी बनाए। तब टूरिस्ट परमिट की ट्रेवल्स कंपनियों की बसों में लगेज लादने व सवारियां बिठाने की अनियमितता सामने आ गई। फिर भी छिटपुट चालान के आगे कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। इससे परमिट का उल्लंघन करने वाली बसों के चालान बनाने और भविष्य में परमिट के अनुसार चलने के लिए पाबंद करने के दावे की पोल खुल गई।
न दफ्तार पर अंकुश, न सुरक्षा मानक
ट्रेवल्स कंपनियों की बसों की रफ्तार पर कोई अंकुश नहीं है। कुछ 32 से अधिक सीट क्षमता वाली ट्रेवल्स बसों में नियम विरुद्ध स्लीपर सीटें बना डाली। लंबी बसें होने के बावजूद दो दरवाजे आपातकालीन खिडक़ी तक नहीं है। बिना वर्दी के ही चालक, परिचालक मनमानी कर रहे हैं, लेकिन परिवहन महकमे द्वारा सिर्फ परमिट नियमों के उल्लंघन पर चालान बना कार्रवाई की औपचारिकता की जा रही है।
ट्रेवल्स कंपनियां नहीं पाबंद
एक जगह से दूसरी जगह तक तय किराए में निश्चित यात्रियों को पहुंचाने के लिए ट्रेवल्स कंपनियों ने लगभग सभी बसों का कॉन्ट्रेक्ट केरिज का परमिट है। फिर भी ये ट्रेवल्स कंपनियों की बसें खुलेआम जगह जगह से यात्रियों को बिठा रहे हैं। फिर भी परिवहन विभाग द्वारा ट्रेवल्स कंपनी को पाबंद नहीं किया गया कि परमिट के विरुद्ध बसों का संचालन क्यों हो रहा है।





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