कोटा. सब्जी के साथ मिलने वाला गुणकारी धनिया अब कीमती हो गया है। मसाले के बाद इसके ऑयल से मेडिसिन भी बनने लगी है। राजस्थान व मध्यप्रदेश का धनिया कई देशों में पहली पसंद बन चुका है। इसका अरोमा यानि खूशबू दुनियाभर में मशहूर है। देशभर के विशेषज्ञ व मसाला उत्पादकों के तकनीकी सुझावों से धनिए की खेती करने वाले किसानों को इसकी क्वालिटी में सुधार करने का मौका मिलेगा और उनकी आय भी बढ़ेगी।
यह बात झालावाड़ रोड स्थित एक होटल में खाद्य पदार्थ कन्वेसिंग एजेंट एसोसिएशन की ओर से रविवार को तृतीय नेशनल धनिया सेमिनार के उद्घाटन समारोह में संभागीय आयुक्त एल.एन.सोनी ने कही। उन्होंने कहा कि हरे धनिए की राजस्थान में अच्छी पैदावार हो रही है, ऐसे उपयोगी सेमिनार से इसके निर्यात के लिए नए रास्ते खुलेंगे, जिससे हाड़ौती अंचल के किसानों को लाभ मिलेगा।
लाडपुरा विधायक कल्पना देवी ने कहा कि हमें खुशी है कि हाड़ौती के किसान यहां के धनिए की खुशबू देश से बाहर तक फैला रहे हैं। मेरी मां शिमला से फोन करके कोटा से धनिया मंगवाती है। इसका निर्यात बढ़ाने के लिए कोटा में जल्द हवाई सेवा प्रारंभ करने के लिए प्रयास करेंगे। राजस्थान में इसका रकबा लगातार घट रहा है, जबकि पैदावार अच्छी हो रही है, इसे बढ़ाने के लिए भरसक प्रत्यन करेंगे।
एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाशचंद दलाल ने बताया कि दो सत्रों में हुई पैनल चर्चा के अनुसार, इस वर्ष देश में 65 से 70 लाख बैग धनिया की पैदावार होगी। इतना ही पिछले वर्ष का स्टॉक होने से इस वर्ष की उपलब्धता 1.30 करोड़ बोरी रहेगी। धनिए का निर्यात व औसत घरेलू खपत 1.20 करोड़ बोरी होने से इसकी डिमांड बनी रहेगी, जिससे मंदी आने की संभावना नहीं रहेगी।
विशिष्ट अतिथि हॉर्टिकल्चर विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राम अवतार शर्मा एवं पीके गुप्ता ने कहा कि उद्योग वानिकी द्वारा बोरखेड़ा में धनिए की नई किस्म इजाद करने पर शोध चल रहा है, जिसमें ऑयल की मात्रा बढ़ाई जा सके। धनिए में ऑयल बढऩे से विदेशों में इसकी डिमांड और बढ़ जाएगी। किसानों को जागरूक करने के लिए ऐसे सेमिनार बहुत फ ायदेमंद है।
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मसाला कंपनियां खरीदती हैं 50 फ ीसदी धनिया
आची मसाला फू ड्स, चेन्नई के सीनियर मैनेजर एस. धंडापनी ने कहा कि हम राजस्थान में कोटा व रामगंजमंडी तथा मप्र के कुंभराज से अच्छी क्वालिटी का धनिया खरीदते हैं। यहां देश में नबर-1 क्वालिटी मिलती है। हम सभी देशों में मसाला निर्यात करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि किसान धनिए की खेती में पेस्टिसाइड्स का प्रयोग कम करें और आर्गेनिक धनिया को बढ़ावा दें।
सबसे बड़ी धनिया निर्यातक कंपनी पीसी कनन, विरुद्धनगर के निदेशक पीसीके महेश्वरन ने कहा कि पिछले 2 वर्षों में धनिए का निर्यात कम रहा, लेकिन इस वर्ष 45 हजार मीट्रिक टन (10 लाख बोरी) धनिया निर्यात होने की संभावना है। हमारे देश में धनिए की फ सल तैयार हो गई है, जबकि रूस व यूक्रेन में नई फसल जुलाई के अंत तक आएगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान व मप्र के हरे धनिए की दुनिया में सबसे अधिक डिमांड रहती है।
धनिया ब्रोकर महावीर गुप्ता व किरीट भाई ने कहा कि सेमिनार में देश के व्यावसायियों ने धनिया पैदावार, फसल पूर्वानुमान, क्वालिटी, खपत आदि पर पैनल चर्चा कर उपयोगी सुझाव दिए। एसोसिएशन के सचिव रतनलाल गोचर ने सभी प्रतिनिधियों का आभार जताया। दक्षिण भारत से प्रतिनिधियों ने कहा कि कोटा में एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी है, लेकिन यहां एयर कनेक्टिविटी वर्तमान की सबसे बड़ी आवश्यकता है।





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