भुवनेश पण्ड्या
उदयपुर . मेवाड़-वागड़ में अब ाी बच्चों और उनके अ िा ाावकों की पहली पसंद सरकारी पाठशाला बने हुए हैं। उदयपुर जिले में ६ से १४ वर्ष आयु वर्ग के केवल १९.८ प्रतिशत बच्चे निजी स्कूलों में शिक्षा ले रहे हैं। दूसरी ओर सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद राजधानी जयपुर में ६६.७ प्रतिशत बच्चों और उनकेअ िा ाावकों को निजी स्कूल रास आ रहे हैं।
सरकारी स्कूलों में नामांकन के मामले में डूंगरपुर जिले ने एक कीर्तिमान कायम किया है, वहां निजी स्कूलों में केवल ८.३ प्रतिशत बच्चे ही अध्ययनरत हैं। हालांकि डूंगरपुर में अन्य जिलों से मुकाबले निजी स्कूल कम हैं। निजी स्कूलों में ६ से १४ वर्ष आयु वर्ग के नामांकन में बाड़मेर १०.२ प्रतिशत के साथ दूसरे न बर पर है। बांसवाड़ा में १५.१, राजसमंद में १७.०८ एवं प्रतापगढ़ में १४.६ प्रतिशत बच्चे ही निजी स्कूलों में अध्ययन कर रहे हैं। इसके विपरीत झुंझुनूं के ५८ और ारतपुर के ५६ प्रतिशत बच्चे निजी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
असर की रिपोर्ट में सामने आई हकीकत
यह हकीकत देश में प्राथमिक शिक्षा की दशा-दिशा का जायजा लेने वाली वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट असर-२०१८ में सामने आई है। असर- २०१७ में बियॉन्ड बेसिक्स के तहत गैर व्यावसायिक संस्था प्रथम ने यह सर्वे करवाया है। सर्वे ३ से १६ वर्ष के स्कूलों में नामांकन और ५ से १६ वर्ष के बच्चों की पढऩे एवं गणित करने की बुनियादी क्षमताओं पर केन्द्रित हैं। २००५, २००७ और २००९ से निरंतर गांव के सरकारी स्कूलों को ाी इस सर्वे में शामिल किया गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-२०१० के बाद असर सर्वे में उन मापन योग्य मानकों की पड़ताल को शामिल कर लिया गया, जो इस कानून के तहत हर विद्यालय के लिए जरूरी है। २०१८ में १५९९८ स्कूलों का अवलोकन किया गया। असर-२०१८ ने ग्रामीण ाारत के ५९६ जिलों तक पहुंच बनाई। इसमें कुल ३,५४,९४४ घरों, ३ से १६ वर्ष के ५,४६,५१७ बच्चों का सर्वेक्षण किया गया।
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इनमें सा ा ाो रहे सरकारी स्कूल
(निजी स्कूलों में जाने वाले बच्चों का प्रतिशत)
झुंझूनूं- ५८.१
ारतपुर- ५६.०
सीकर- ५१.९
दौसा- ५१.३
अलवर- ४८.१
हनुमानगढ़- ४८.७
करौली- ४३.६
चूरू- ४३.१
स. माधोपुर- ४२.७
नागौर- ४१.८
जोधपुर- ४०.६
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वर्ष २०१४ के पहले से निजी स्कूलों की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा था, लेकिन वर्ष २०१६ के बाद निजी स्कूलों का कई जिलों में मोह टूटा हैं। यह सरकारी स्तर पर किए गए प्रयासों के कारण है।
रामकृष्ण चौधरी, स्टेट हैड असर





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