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खेल टिकट का : ये लेने को तैयार नहीं और इन्हें मांगे नहीं मिल रहा..


कोटा. राज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद अब भाजपा के कुछ विधायक एवं पूर्व मंत्रियों ने दिल्ली की राह पकडऩे की तैयारी कर ली है। केन्द्र की सत्ता में भाजपा के फिर से लौटने की उम्मीद लेकर ये सभी नेता टिकट की कतार में हैं। इस आस में कि चुनाव लड़कर दिल्ली पहुंचें और वहां सरकार में भागीदारी मिल जाए। इनमें छह से ज्यादा ऐसे विधायक एवं पूर्व मंत्री हैं जो टिकट के लिए जोड़-तोड़ में लगे हैं। खास बात यह है कि हाल में भाजपा का टिकट लेकर विधानसभा चुनाव हार चुके नेता भी इस दौड़ में हैं। कुछ ऐसे कद्दावर नेता भी शामिल हैं, जिन्हें पार्टी तो चुनाव लड़ाना चाहती है लेकिन वे तैयार नहीं हो रहे। इनमें सबसे बड़ा नाम पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का है। केन्द्रीय नेतृत्व उन्हें बारां-झालावाड़ सीट से चुनाव में उतारने का पक्षधर है। इसी सीट से उनके बेटे दुष्यंत सिंह लगातार तीन बार से सांसद हैं। ऐसी स्थिति में यदि वहां से वसुंधरा को उतारा जाता है तो दुष्यंत के टिकट पर गाज गिरेगी। ऐसी स्थिति से बचने के लिए वसुंधरा चुनाव में उतरने को तैयार नहीं हैं। गौरतलब है कि केंद्रीय नेतृत्व तीनों उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे , शिवराज सिंह और रमन सिंह को चुनाव लडऩे केे लिए कह चुका है लेकिन वसुंधरा राजे और रमन सिंह अपने बेटों के लिए टिकट मांग रहे हैं। इससे मोदी और शाह दोनों नाराज बताए जा रहें है। सूत्रों की माने तो इन नेताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि वे या तो चुनाव लड़ें या सन्यास ले लें।


टिकट की चाह में कभी जयपुर तो कभी दिल्ली..
टिकट की आस में कुछ ऐसे कद्दावर नेता भी हैं, जो विधानसभा चुनाव में तो हार गए लेकिन लोकसभा का टिकट लेकर दिल्ली की सरकार में भागीदारी निभाने की उम्मीद में हैं। अंता विधानसभा से चुनाव हार चुके पूर्व केबिनेट मंत्री प्रभुलाल सैनी टोंक-सवाईमाधोपुर से जुगत में हैं। हर बार अलग जगह से चुनाव लडऩे वाले सैनी विधानसभा चुनावों में अंता से चुनाव लड़े थे और प्रमोद जैन भाया के हाथों बड़े अंतर से हार गए थे लेकिन इस बार टिकट पाने की खातिर इन्होंने भी दिन-रात एक कर रखी है।



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