जालोर. उप पंजीयक कार्यालय रामसीन से पिछले साल जुलाई में स्थानांतरण के बाद मनमर्जी से उपस्थिति रजिस्टर में काट छांट कर राजिस्टर में फिर से अपना नाम दर्ज कर पद पर जमे रहने वाले रामसीन नायब तहसीलदार कल्पेश जैन को कलक्टर ने 16 सीसीए नोटिस जारी किया है। साथ ही कलक्टर ने इस मामले में निबंधन राजस्व मंडल अजमेर को नायब तहसीलदार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी पत्र लिखा है। मामले का खुलासा 27 फरवरी को बासड़ाधनजी निवासी रमजान खां द्वारा सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में हुआ है। जिसमें यह उल्लेख है कि नायब तहसीलदार कल्पेश जैन ने पिछले साल डांगियावास स्थानांतरण होने के बाद मनमर्जी से उपस्थिति रजिस्टर में काट छांट की।
अनुशासनहीनता एवं निरंकुश कृत्य ठहराया
कलक्टर द्वारा जारी नोटिस में उल्लेख है कि नायब तहसीलदार का यह कृत्य गैर जिम्मेदाराना, अनुशासनहीनता एवं पद व्यवस्था के विपरीत निरंकुश कृत्य है। आरोप पत्र में जिक्र है कि नायब तहसीलदार ने अपने राजकीय दायित्व एवं कर्तव्य पालन में लापरवाही बरती है।
नोटिस में 7 आरोप
आरोप पत्र में बताया गया है कि 30 जुलाई २०१८ को उप तहसीलदार रामसीन का नायब तहसीलदार डांगियावास के रूप में स्थानांतरण हो गया था। साथ ही 6 अगस्त को दोपहर बाद जसवंतपुरा तहसीलदार को कार्यभार सौंपने के साथ यहां से नवीन पदस्थापन के लिए रिलीव किया गया था। इसकी सूचना ईमेल और व्हाट्सएप पर भेजी गई। जिसके बाद उप तहसील रामसीन के उपस्थिति रजिस्टर में नायब तहसीलदार कल्पेश जैन के आगे 6 अगस्त 2018 को कार्यमुक्त के नोट का अंकन किया गया था। आरोप है कि 7 अगस्त को जैन को रीडर ने आदेश की प्रति दी। उसके बाद भी जैन ने उपस्थिति रजिस्टर में कार्यमुक्त नोट को काट कर नीचे पुन: अपना नाम लिखकर हस्ताक्षर कर दिए। इसी तरह आरोप है कि 6 अगस्त 2018 को कार्यमुक्त होने के बाद भी 10 अगस्त तक जबरन उप तसहील में प्रवेश कर स्टाफ को धमका कर भूमि प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर किए एवं दो रजिस्ट्रियों पर मार्क कर पंजीयन किया। आरोप है कि रीडर अरविंद मेघवाल द्वारा कार्यमुक्त का आदेश तामील करने, कार्य करने के लिए आप अधिकृत नहीं है का कहने के बावजूद पंजीयन कार्य किया, जबकि चार्ज तहसीलदार जसवंतपुरा के पास था। आरोप है कि नायब तहसीलदार का स्थानांतरण निरस्त होने पर 3 सितंबर 2018 को उपस्थिति रजिस्टर लेकर आए। इस अवधि में कार्मिक ने सफेद पेपर पर हस्ताक्षर किए एवं उनसे पुन: रजिस्टर में हस्ताक्षर करवाए गए। वहीं तहसीलदार जसवंतपुरा द्वारा उपस्थिति रजिस्टर के बारे मे ंउप तहसील स्टाफ से पूछने पर सामने आया कि नायब तहसीलदार के कार्यमुक्त नोट 6 अगस्त 2018 को 7 अगस्त 1018 को कल्पेश जैन ने काट कर नीचे अपना नाम लिखकर राजिस्टर अपने कब्जे में लेकर चले गए।
तहसीलदार-कलक्टर को बताया भी उचित नहीं समझा
नोटस के आरोप क्रमांक 5 में बताया गया है कि कल्पेश जैन का स्थानांतरण डांगियावास होने के बाद उन्होंने मनमर्जी की। डांगियावास से उनका पुन: रामसीन स्थानांतरण 27 अगस्त 2018 को हुआ। जबकि 7 अगस्त से 8 सितंबर तक यहा का चार्ज तहसीलदार जसंवतपुरा के पास रहा। आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम में 3 सितंबर 2018 को नायब तहसीलदार रामसीन के पद पर कल्पेश जैन ने पुन: कार्यक्रजण करने की सूचना भी जिला कलक्टर जालोर एवं तहसीलदार जसवंतपुरा को नहीं दी। यही नहीं जसवंतपुरा तहसीलदार द्वारा उपस्थिति रजिस्टर की फोटो प्रति 10 अगस्त को पंजीयन दस्तावेजों की प्रतियां जांच में मांगनेे पर भी उपलब्ध नहीं करवाई। इन आधारों पर कुल 7 आरोप लगाते हुए नायब तहसीलदार कल्पेश जैन को कलक्टर ने 16सीसीए का नोटिस जारी कर विभागीय स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई को पत्र लिखा गया है।
पत्रिका ने सामने लाया था गड़बड़झाला
रामसीन नायब तहसीलदार द्वारा मनमर्जी से सरकारी आदेशों के उल्लंघन करने और उसके बाद भी पद पर जमे रहने, रजिस्टर में काट छांट के मामले में पत्रिका में सिलसिलेवार समाचार प्रकाशित किए थे। पत्रिका ने १५ अगस्त २०१८ को 'नायब तहसीलदार 6 को रिलीव और 10 अगस्त को बनाया प्रमाण पत्रÓ, स्थानांतरण के बाद भी नहीं छूट रहा कुर्सी का मोह शीर्षक से समाचार प्रकाशित किए। साथ ही यहां चल रहे गड़बड़झाले को भी उजागर किया।
इनका कहना
यह प्रकरण अजमेर मंडल को भेजा गया था। विभागीय स्तर पर ही जांच के साथ कार्रवाई के लिए लिखा गया था।
छगनलाल गोयल, एडीएम, जालोर
(मामले में नायब तहसीलदार के मोबाइल पर संपर्क किया गया, फोन नो-रिप्लाय रहा)





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