प्रतापगढ़ सीतामाता अभयारण्य स्थित कालाकोट ग्राम पंचायत के नारेलाखेड़ा, दामाखेड़ा, तालाब फलां, लिमड़ीखेड़ा गांव में गुरुवार को वन विभाग की ओर से हटाए गए आठ अतिक्रमण का मामला तुल पकड़ गया। मामले में प्रतापगढ़ विधायक रामलाल मीणा और अन्य जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। जहां स्थिति की जानकारी ली। इस संबंध में सभी लोग धोलापानी थाने पहुंचे, जहां वन वभिाग के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य में धोलापानी थाना इलाके के नारेलाखेड़ा, दामाखेड़ा, तालाब फलां, लिमड़ीखेड़ा गांवों में आठ लोगों ने गत वर्षों से अतिक्रमण किया हुआ है। ऐसे में वन विभाग की ओर से इन लोगों को यहां से अतिक्रमण हटाने के लिए कहा था। इस संबंध में विभाग की ओर से अगस्त 2018 में अधिकारियों ने गांवों में पहुंचकर समझाइश भी की थी।जिसमें ग्रामीणों ने कहा था कि फसल कटाई के बाद अतिक्रमण हटा दिया जाएगा।इसके बाद भी यहां से अतिक्रमण नहीं हटाया गया। इस पर विभाग ने जिला प्रशासन को भी इस संबंध में अवगत कराया था। नोटिस देने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाए गए।इस पर वन विभाग की टीम ने गुरुवार को यहां से अतिक्रमण हटाया गया।जिसमें झोंपडिय़ां, खेत नष्ट किए गए। कुएं को भी ***** दिया। इस संबंध में यहां के लोगों की सूचना पर विधायक रामलाल मीणा, पूर्वप्रधान मनोहरलाल आंजना समेत कई जनप्रतिनिधि गांवों में पहुंचे। जहां लोगों की समस्याएं सुनी।इसके बाद जिन लोगों के अतिक्रमण हटाए गए थे।उनके साथ धोलापानी पहुंचे और वन विभाग अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। वहीं विधायक रामलाल मीणा ने अतिक्रमण हटाने के दौरान हुए नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया है।
दूरभाष पर कराया मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत
इसकी जानकारी विधायक रामलाल मीणा ने जयपुर में भी बताई है। जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय, मंत्री उदयलाल आंजना आदि को बताई है। साथ ही वनाधिकार प्रक्रिया के बारे में बताया है। कार्रवाई करने और पीडि़तों को मुआवजे की मांग की है।
इन लोगों के हटाए अतिक्रमण
यहां अभयारण्य में आठ लोगों के अतिक्रमण हटाए गए है। जिनमें
कई बार की समझाइश, फिर की नियमानुसार कार्रवाई
अभयारण्य में जो अतिक्रमण हटाए गए है।वहां के लिए विभाग की ओर से गत 6 माह से समझाइश की जा रही है। यहां अतिक्रमण हटाने के लिए गांव में शिविर भी लगाए थे। जिसमें गत अगस्त में अतिक्रमियों ने फसल समेटने के बाद अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया था। इनमें से कई के अन्य गांवों में मकान भी है। वहीं गांव के अन्य लोगों ने रोष जताया था कि इनके अतिक्रमण हटाए जाए।इसे लेकर विभाग ने नोटिस भी जारी किए थे।इस संबंध में जिला कलक्टर को भी अवगत कराया हुआ था। अतिक्रमण भी वर्ष 2013 के बाद धीरे-धीरे बढ़ाया गया है।जो जीपीएस के माध्यम से जानकारी जुटाई थी।
सविता दहिया
उपवन संरक्षक, वन्यजीव(चित्तौडगढ़़)





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