भीलवाड़ा।
वस्त्रनगरी में पिछले सौ साल से शीतला सप्तमी के मौके पर मुर्दे की सवारी निकाली जाती है। इस परम्परा के तहत बुधवार को शहर में मुर्दे की शव यात्रा निकाली गई। यह पहला मौका था जब आयोजकों को अर्थी पर लेटने के लिए कोई भी युवक नहीं मिला।
आयोजको के अनुसार बुधवार दोपहर में चित्तौड़ वालों की हवेली के पास से ईलाजी की डोल (मुर्दे की सवारी) निकाली गई। सनेती पर कोई मुर्दा या शव (प्रतीकात्मक) नहीं था। फिर भी इस यात्रा में युवा गीत गाते तथा गुलाल उड़ाते चल रहे थे। इस दौरान आतिशबाजी भी की गई। मुर्दे की सवारी मशीनरी मार्केट गोल प्याऊ चौराहा, गुलमण्डी होते बहाला पहुंची जहां मुर्दे के प्रतीकात्मक रूप से जलाया गया। लोगों का कहना है, करीब सौ साल से मुर्दे की सवारी निकाली जाती है। अर्थी पर एक युवक को सुलाया गया, जो यात्रा शुरू होने के साथ ही गायब हो गया। बाद में सूखे चारे की अर्थी बनाई गई। इस दौरान अर्थी के साथ चल रहे युवक टूटी झाडू से मुर्दे की पिटाई करते चल रहे थे। इसे देखने भीड़ उमड पड़ी। यात्रा शान्ति पूर्वक निकले इसके लिए पुलिस के पुख्ता इंजताम किए गए थे।





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