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राजस्थान में यहां भारत-पाक सीमा से सटे इलाके में बिना वर्दी के पहरेदार बने ग्रामीण, सूनी हुई चौपालें

रायसिंहनगर (श्रीगंगानगर)।

भारत-पाक सीमा से सटे इलाके में बिना वर्दी के पहरेदारों की आंखें भी देश की निगाहबान बनी हुई है। बिना वर्दी के पहरेदार हैं सीमा पर बसे गांवों के ग्रामीण। अफवाहों से बहुत दूर अब ग्रामीणों की नजरें सतर्क हैं। अपने काम से ज्यादा निगाह इन ग्रामीणों की संदिग्ध लोगों या फिर वस्तुओं पर होती है। गांवों से बॉर्डर की तरफ पडऩे वाले खेतों में जाने वाले ग्रामीण अब सैन्य गतिविधियों से संबंधित कोई भी बात अपने साथियों से भी शेयर नहीं करते।

 

सुरक्षा बल भी सीमा से सटे गांवों के बाशिंदों को अनावश्यक रोकटोक नहंी करते। क्योंकि यही ग्रामीण संकटकालीन परिस्थितियों में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर रहते हैं। सन १९६५ व १९७१ के युद्धों को ग्रामीण भूले नहीं है। ग्रामीण गांवों से खेत तक हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

 

सूनी चौपालें, अंधेरे के साथ गलियां वीरान

चक २२ पीटीडी, खाटां, ३८ पीएस, ३७ पीएस, ४१ पीएस, काकू??सिंहवाला जैसे कई गांव है जो तारबंदी से महज कुछ ही दूरी पर है। इन गांवों के ग्रामीण अच्छी तरह जानते हैं कि शाम छह से सुबह सात बजे तक सीमावर्ती इलाके में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हुए हैं। एेसे में ग्रामीण अपने स्तर पर ही शाम होते-होते अपने घरों में चले जाते हैं। अंधेरा होने तक गांव की गलियां पूरी तरह से वीरान हो जाती है। कमोबेश यही स्थिति दिनभर में चौपालों की है। दिन की चौपालें

 

अब सिर्फ इसलिए सूनी हो गई है ताकि कोई अफवाह नहीं फैले।

चक 22 पीटीडी निवासी नंदलाल ने बताया कि लोगों के एकत्र होते ही अफवाहें शुरू हो जाती है। एेसे में अब लोग एकत्र नहीं होकर अपने काम लगे रहते हैं। चक ३८ पीएस बी निवासी भजन सिंह ने बताया कि हम लोग दशकों से सीमा पर रह रहे हैं। उन्हें उनके दायित्वों के बारे में भलीभांति पता है। चक ३७ पीएस निवासी कुलविन्द्र सिंह कहते हैं कि बच्चों तक को संदिग्ध वस्तुओं अथवा व्यक्तियों पर नजर रखने के लिए समझाया गया है।

 

प्रशासन का भी कर रहे सहयोग

सुरक्षा की आवश्यकताओं के चलते अब ग्रामीण अपनी समस्याओं को भूल गए हैं। यहां तक कि ग्रामीण अब अपनी सामान्य समस्याएं लेकर भी प्रशासन के पास नहीं जा रहे। सीमा से सटे इलाकों में चल रही सघन जांच को अब ग्रामीण परेशानी समझने के बजाय सहयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि सीमावर्ती इलाकों से आए दिए आने वाली धरना प्रदर्शन और ज्ञापनों का दौर थम सा गया है। बाहर निकलते समय हर नागरिक अपने पहचान संबंधी दस्तावेज हर हाल में साथ रखते हैं।

 

मिल रहा है अच्छा सहयोग

सीमा से सटे इलाकों के ग्रामीण प्रशासन, पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों का जबरदस्त सहयोग कर रहे हैं, यही वजह है कि अफवाहों पर विराम सा लग गया है, हम ग्रामीणों के इस सहयोग से राहत महसूस कर रहे है
-संदीप कुमार काकड़, उपखंड अधिकारी रायसिंहनगर



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