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शहीद बल्लू की याद में मनाई जाती है डोलची होली

खेड़ला. यहां समीप के ग्राम पावटा में होली के बाद दूज को शहीद बल्लू सिंह की याद में डोलची होली का आयोजन किया जाता है। बुजुर्गों का कहना है कि आज से करीब 6 00 साल पहले आपस में दो समुदायों के झगड़े के दौरान बल्लू सिंह शहीद हो गए थे और उनके सिर धड़ से अलग कर दिया गया था। इसके बावजूद भी हो विपक्षी सेना से लड़ते रहे और जब तक उन्होंने दूसरी सेना का खात्मा नहीं कर दिया तब तक वह लड़ते रहे आज उनकी याद में हर वर्ष पावटा कस्बे के हदीरा मैदान में डोलची होली का आयोजन होता है। इसके बाद देवर भाभी की होली भी खेली जाती है।

 



आज भी सजती हैं सेनाएं


6 00 साल पूर्व हुए झगड़े के बाद आज भी पावटा में दो सेनाएं तैयार होती हैं, जिनके हाथ में चमड़े की डोलची और रंग की बाल्टी होती है जिनमें में एक सेना पीलवाड़ पट्टी और दूसरी जिंद पार्टी की ओर से आती है। इस दौरान एक दूसरे की पीठ पर डोलची से बौछार मार कर शहीद बल्लू सिंह के नारे लगाए जाते हैं, फिर पंच पटेलों की समझाइश के बाद इस खेल को समाप्त किया जाता है। इसके फिर देवर भाभी की होली और ढोला मारू की सवारी निकाली जाती है।

 

 

मकानों की छत पर चढ़ देखते हैं लोग


ढोलची होली को देखने के लिए यहां न केवल पावटा बल्कि आसपास के गांवों से भी बड़ी सख्यां में ग्रामीण आते हंै। भीड़ इतनी हो जाती है कि लोग मकानों की छतों पर चढ़ कर डोलची होली का दृश्य देखते हैं।

 

 

मंगल गीतों के साथ होता है होली दहन

 

होली के त्योहार पर होली दहन पर महिलाएं मंगल गीत गाती हैं। ग्रामीण इलाकों में गेहूं व जौ की बालियां सेकी जाती है। लोग होली दहन के बाद गेहूं व जौ की बालियों को दानों को चबाया जाता है। लोगों का मानना है कि इससे दंत रोग से मुक्ति मिलती है।



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