रामसिंहपुर.
क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पंचायत एक एलएम में करीब पौने तीन करोड़ रुपए की लागत से बने वाटर वक्र्स की डिग्गियां नहर के पानी से भरी होने के बावजूद लोगों को कुएं का फ्लोराइड युक्त खारा पानी पीना पड़ रहा है। असल में इन डिग्गियों से पानी उठाने वाली मोटर खराब है, इस कारण कुएं का खारा पानी ही आसपास के गांवों में आपूर्ति हो रहा है। इसके साथ ही डिग्गियों से जलापूर्ति नहीं होने से पानी काला हो गया है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाने के बावजूद समस्या का निराकरण नहीं हो पा रहा है।
जानकारी के अनुसार ग्रामीण जल योजना के तहत 17 दिसम्बर 2014 को दो करोड़ 97लाख रुपए की लागत से वाटर वक्र्स का निर्माण करवाकर जलापूर्ति शुरू की गई थी। करीब बारह गांव व चकों को इससे जोड़ा गया था।
पूर्व पंच साहबराम कूकणा, शंकरलाल भाम्भू, रणवीर जांगू, संतोष सिद्ध व ओम जांगू आदि ने आरोप लगाया कि वाटर वक्र्स अभी गारंटी अवधि में है। इसके बावजूद वाटर वक्र्स के हाल बेहाल है। डिग्गियों से पानी उठाने वाली मोटरें पन्द्रह दिन से खराब पड़ी है। इसके चलते ठेकेदार की ओर से नियुक्त जलापूर्ति करने वाला कर्मचारी वाटर वक्र्स में ही बने कुएं से गांव व चकों में खारे पानी कि आपूर्ति कर रहा है। ग्रामीणो का कहना है कि इस कुए का पानी फ्लोराईड युक्त और खारा है। इससे कई प्रकार कि बीमारियां फैलने की आशंका है।
सफाई के अभाव में फिल्टर में जमीं काई
ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष शुद्ध जल के लिए राज्य सरकार की ओर से लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद वाटर वक्र्स की हालात खराब है। चार साल पहले बने फिल्टर सफाई के अभाव में काई से भरे पड़े है और डिग्गीयों से जलापूर्ति नही करने से पानी काला हो गया है ।
जुड़े हैं ये गांव व चक
इस वाटरवक्र्स से गांव एक एलएम, एक, दो, चार, पांच व छह जीएम, दो डीओ ए, दो डीओ बी व तीन सीएम आदि गांव व चकों में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। पिछले पन्द्रह दिन से इन गांवों में खारे पानी के कुए से जलापूर्ति दी जा रही है। इससे लोगों में विभाग के प्रति आक्रोश है।
इस बारे में ठेकेदार प्रतापसिंह का कहना है कि डिग्गियों से पानी आपूर्ति करने वाली मोटर खराब हो गई थी। इसे अब ठीक करवा लिया गया है। एक दो दिन में नहर से जलापूर्ति शुरू करवा दी जाएगी।





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