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आखिर प्रदूषण नियंत्रण मण्डल बोर्ड क्यो चुप है, डेयरी ने तोड़े नियम-कायदे

भीलवाड़ा।


भीलवाड़ा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (भीलवाड़ा डेयरी) का शीतला सप्तमी पर दूध व पनीर की रिकॉर्ड बिक्री का दावा खुद पर भारी पड़ सकता है। डेयरी ने अपनी क्षमता से अधिक दूध का प्रोसेस किया, जो राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मण्डल बोर्ड के नियम की अवहेलना है। बोर्ड अब डेयरी से जवाब मांगने जा रहा है।

दरअसल डेयरी का दावा है कि शीतला सप्तमी पर ६ लाख ५ हजार लीटर दूध व २२०० किलोग्राम पनीर की बिक्री की। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि भीलवाड़ा डेयरी को इस साल ३० अप्रेल तक २ लाख लीटर क्षमता का प्लांट चलाने की ही अनुमति है। हालांकि डेयरी ने प्लांट के विस्तार के लिए अर्जी दे रखी है लेकिन अभी बोर्ड ने किसी भी तरह की मशीन लगाने या विस्तार की स्वीकृति नहीं दी है। इसके बावजूद डेयरी ने एक दिन में ६ लाख लीटर दूध प्रोसेस कर घरों में पहुंचा दिया।

पानी भी कर रहे दूषित
डेयरी ने एक दिन में २२०० किलो पनीर बेचने का दावा किया जबकि १०० लीटर दूध से मात्र १८ किलो पनीर बनता है। शेष ८२ लीटर पानी होता है जो प्रोसेस के दौरान दूषित हो जाता है। इसे भी डेयरी अपने कुएं में डाल रही है। इसके अलावा प्लांट, केन व टैंकरों की सफाई पर भी लाखों लीटर पानी इस्तेमाल किया, जिसे दूषित होने के बाद कोठारी नदी में छोड़ दिया गया। गौरतलब है कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी के अलावा बोर्ड के सदस्य सचिव व चेयरमैन पर डेयरी के नियमों की पालना कराने का जिम्मा है।

लेंगे जानकारी
भीलवाड़ा डेयरी प्लांट में प्रतिदिन २ लाख लीटर दूध प्रोसेस की अनुमति है। प्लांट की क्षमता बढ़ाने व मशीनरी लगाने के लिए डेयरी ने आवेदन किया है लेकिन फिलहाल मंजूरी नहीं मिली है। डेयरी से एक दिन में ६ लाख लीटर दूध बिक्री की सूचना मिली है। इस बारे में जानकारी के लिए पत्र लिखेंगे। पूछेंगे कि ६ लाख लीटर दूध का प्रोसेस कैसे किया?
राजीव पारीक, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

डेयरी ने शीतला सप्तमी पर दूध की रिकॉर्ड बिक्री की है। इस बार ६ लाख लीटर दूध बेचा। यह दूध दो दिन का मिलाकर है। दिन भर चले प्रोसेस के बाद यह रिकाडऱ् बनाया है।
एलके जैन, प्रबन्धक भीलवाड़ा डेयरी



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