Breaking News
recent

इस बार की होली कुछ खास, यहां गांव में भी मनाई जाएगी इस अंदाज में होली

कानोड़. प्राकृतिक सुगंध के साथ हर्बल गुलाल बनाने का कार्य स्थानीय वन विभाग कार्यालय में जोरोंं पर चल रहा है , केमि‍कल से बनी गुलाल से लोगोंं को दूर करने के साथ ही महिलाओंं को हर्बल गुलाल बनाकर स्वरोजगार से जोड़ आत्मनिर्भर बनाने के लिए वन विभाग का सपना साकार होता दिख रहा है ।विभाग ने गत वर्ष 2018 से यह कार्य शुरू करते हुए कानोड़ व सेमलिया वन नाके पर 1.50 क्विटंल गुलाल बनाई थी , लेकिन पहले वर्ष इस गुलाल की खपत कम हुई । फीर भी विभाग ने 2019 वर्ष भी इस कार्य को जारी रखते हुए महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने की जिम्मेंदारी सौपी है । कानोड़ व सेमलिया वन नाके पर चामुण्डा स्वयं सहायता समुह व आकोला स्वयं सहायता समुह की बीस महिजाओं द्वारा गुलाल बनाने का कार्य किया जा रहा है । इस बार दोनो ही वन नाका सेंटर पर दो क्विटंल गुलाल बनाई जा रही है । गुलाल की किमत 150 रूपये प्रति किलो ग्राम विभाग ने तय किया है । गुलाल बेचेने के बाद मिले मुनाफ राशि को स्वयं सहायता समूूह की महिलाओं में वितरित किया जाएगा । वन विभाग के अनुसार इस गुलाल को बनाने से लेकर बेचने तक का कार्य स्वयं सहायता समूूह की महिलाओं के जिम्मे किया गया है लेकिन ग्रामीण महिलाओं द्वारा बेचने का कार्य नहीं कर पाने व हिसाब नहीं रख पाने पर विभाग के कर्मचारी इस कार्य में समूूह की महिलाओं के सहयोगी बनते हैंं ।

ऐसे बनती है हर्बल गुलाल

हर्बल गुलाल बनाने के लिए फूल या हरी पत्ति‍यांं जंगल से बीनकर लाने के बाद उन्हेंं उबाला जाता है , जिसके बाद उबले पानी को छान उसमें आरारोठ पाउडर मिलाकर प्लास्टिक पर सुखा दिया जाता है। दानेदार पाउडर को ग्राइंडर मशीन में पीसकर गुलाल तैयार होती है । इस गुलाल में किसी तरह का केमि‍कल या रंग काम में नहीं लिया जाता ।

 

READ MORE : दो परिवारों में इस विवाद को लेकर कभी हुआ था खूनी संघर्ष, जानेें पूरी कहानी...

 

इस बार गांंवोंं में भी रंग दिखाएगी हर्बल

क्षेत्रीय वन अधिकारी सोमेश्वर त्रिवेदी बताते हैंं कि विभाग के भीण्डर व कानोड़ क्षेत्र में बन रही हर्बल गुलाल उदयपुर के साथ ही शहरोंं में भेजी जाएगी , जहां से विदेशोंं तक इस गुलाल को पसंंद किया जा रहा है । लेकिन गांंवोंं में इस गुलाल का प्रचलन व प्रचार प्रसार नहीं होने से वहीं पुरानी केमि‍कल से बनी गुलाल काम में ली जाती रही है , लेकिन इस बार जिन गांंवोंं में होली के आयोजन बड़े स्तर पर होते हैंं , जैैसे रूण्डेड़ा , मेनार सहित गांंवोंं में प्रयास किया जा रहा है कि हर्बल गुलाल पहुंंचे । विभाग ग्रामीण लोगोंं तक हर्बल गुलाल पहुंंचाने के लिए सजग दिख रहा है । हर्बल गुलाल का विभाग ने होली से पूर्व प्रचार प्रसार के लिए बैैनर भी लगाए हैंं।

हर्बल गुलाल से लोगोंं को जोडऩा व महिलाओं को स्वरोजगार देना लक्ष्य

केमीकल से बने रंगोंं से बेहतर प्राकृतिक हर्बल गुलाल से होली खेले , विभाग का लक्ष्य जहां महिलाओं को स्व रोजगार से जोडऩा वहीं लोगो को प्राकृतिक रंग की तरफ मोडऩा है । उप वन निदेशक ओपी शर्मा के निर्देशन में दूूसरे वर्ष हर्बल गुलाल बनाने का कार्य जारी है । इस बार दो क्विंटल गुलाल बनाई जा रही है, मांग बढ़़ने पर अधिक बनाई जा सकती है। इस बार विभाग प्रयास कर रहा है कि शहर के साथ गांंवोंं की होली में भी हर्बल गुलाल हो ।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.