सुनील सिंह सिसोदिया / जयपुर। कांग्रेस ने एक दिन पहले प्रदेश की 25 में से 19 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। लेकिन शेष रही 6 सीटों पर पेच फंसा है। ऐसे में इन सीटों पर पार्टी फिर से मंथन कर रही है। बताया जा रहा है कि 6 में से एक सीट पर तो राहुल गांधी ने ही एक दावेदार का नाम रख दिया। वहीं एक सीट को लेकर हाल ही भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए एक नेता को लेकर चर्चा हुई है। लेकिन पार्टी किसी भी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। पहली सूची आने के बाद पार्टी अब जातीय समीकरण भी देख रही है। जिससे कि सभी को खुश रखकर चुनावी वैतरणी पार की जा सके। बताया जा रहा है कि इन सीटों पर सीईसी में चर्चा हो चुकी है। ऐसे में अब पुन: चर्चा किए बिना ही पार्टी के वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के साथ चर्चा कर नामों का एलान कर सकते हैं।
इन सीटों पर यह उलझन
जयपुर ग्रामीण - इस सीट से पिछले दो लोकसभा चुनाव लालचंद कटारिया व सी.पी. जोशी ने लड़े हैं। कटारिया चुनाव जीते, लेकिन जोशी को पराजय का सामना करना पड़ा। वर्तमान में कटारिया मंत्री हैं और जोशी विधानसभा अध्यक्ष ऐसे में पार्टी इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार व केन्द्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के सामने मजबूत चेहरे को लेकर मंथन में जुटी है। यहां दावेदार कई हैं, लेकिन पार्टी मंत्री को इस सीट पर उतारा जाय या फिर किसी युवा चेहरे पर दांव लगाए। इस मंथन में उलझी हुई है।
अजमेर - इस सीट पर उप चुनाव में रघु शर्मा ने भाजपा से भारी अंतर से यह सीट जीती थी। लेकिन वे अब मंत्री बन चुके हैं। ऐसे में यहां भी मजबूत उम्मीदवार को लेकर मामला फंसा हुआ है। चर्चा में कई नाम चल रहे हैं। लेकिन पार्टी इस सीट तिजाऊ उम्मीदवार के साथ ही जातीय समीकरण में उलझकर रह गई है। ऐसे में यहां रघु को नहीं उतारा गया तो पार्टी को भी नया चेहरा ला सकती है।
राजसमंद - इस सीट पर भाजपा की ओर से उम्मीदवार नहीं उतारे जाने की वजह से ही कांग्रेस ने अभी तक उम्मीदवार का एलान नहीं किया है। हालांकि पार्टी कई नामों पर चर्चा कर चुकी है। एक-दो नामों पर मौटे तौर पर चर्चा हो चुकी है। ऐसे में भाजपा के उम्मीदवार की घोषणा होने के बाद उसे देखकर उम्मीदवार का नाम घोषित होगा।
भीलवाड़ा - यहां से पिछला चुनाव अशोक चांदना ने लड़ा लेकिन वे हार गए थे। अब मंत्री बन चुके हैं। इससे पहले सी.पी. जोशी जीत दर्ज की थी। ऐसे में पार्टी के पास यहां मजबूत उम्मीदवार की तलाश करने पड़ रही है। फिर इस सीट पर पार्टी को भारी गुटबाजी का भी सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि पार्टी एकराय बनाकर उम्मीदवार उतारने के पक्ष में हैं। इस सीट के दो दावेदारों की चर्चा एक बैठक में सार्वजनिक रूप से भी हो चुकी है। सीईसी की बैठक में इस सीट पर एक उम्मीदवार का तो राहुल गांधी तक ने नाम लिया था। हालांकि निर्णय नहीं हो सका।
झालावाड़-बांरा - इस सीट से पिछला चुनाव प्रमोद जैन भाया ने लड़ा। लेकिन वे अब मंत्री बन चुके हैं। अब पार्टी का मंथन इस पर चल रहा है कि मंत्री या उनके परिवार में से किसी सदस्य को उतारा जाए या फिर नए चेहरे को। यहां पार्टी अभी तक किसी मजबूत उम्मीदवार को तलाश नहीं पाई है। हालांकि स्थानीय एक-दो लोगों के साथ एक दिन पहले सीईसी में भाजपा छोड़कर पार्टी में शामिल हुए नेता के नाम पर जरूर चर्चा होना बताया जा रहा है। लेकिन पार्टी अभी और मंथन में जुटी है।
श्रीगंगानगर - इस सीट से पिछले चुनाव में पार्टी ने मास्टर भंवरलाल मेघवाल को उतारा था, लेकिन वे भी अब राज्य में मंत्री हैं। ऐसे में पार्टी यहां भी मजबूत उम्मीदवार को लेकर समीकरणों में उलझी है। यहां एक पूर्व सांसद के साथ ही अन्य उम्मीदवार को लेकर चर्चा चल रही है।





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