आहोर. सरकारी व निजी बैंकों की ओर से इन दिनों को लेन-देन की प्रक्रिया को सरल व सहज करने तथा बैंक उपभोक्ताओं को अधिकाधिक सुविधा व राहत प्रदान करने के लिए विभिन्न ऑनलाइन योजनाएं तथा इलेक्ट्रॉनिक व कम्प्यूटराइज्ड मशीनों से लेन-देन की प्रक्रिया शुरू की गई है। लेकिन ऐसे कई मामले सामने आ रहे है। जिसकी वजह से इस ऑनलाइन सुविधा पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हंै। आहोर में दुकानदार अशोक कुमार प्रजापत गत २३ फरवरी को किसी अन्य के बैंक खाते में रुपए जमा करवाने के लिए नेणचंद कोठारी मार्ग पर स्थित एसबीआई शाखा के बाहर लगी नकदी जमा करवाने की मशीन पर पहुंचा। उसने सबसे पहले १५ हजार रुपए मशीन में डाले। जिस पर दो हजार के दो नोट यानि चार हजार मशीन ने वापस लौटा दिए। जिस पर उसने वो दोनों नोट निकालकर अन्य दो हजार के दो नोट यानि चार हजार रुपए वापस मशीन में डाले। इसके बाद मशीन का बॉक्स बंद हो गया तथा प्रक्रिया शुरू हुई। कुछ देर बाद रुपए जमा होने की पर्ची निकली। जिस पर ११ हजार की राशि ही जमा होना दर्शाया गया। शेष चार हजार ना तो खाते में जमा किए गए और ना ही मशीन ने वापस लौटाए। इसके बाद उसने २५ फरवरी को बैंक खुलने पर बैंक मैनेजर को लिखित शिकायत की। लेकिन एक पखवाड़े का लंबा समय गुजर जाने के बाद भी अभी तक बैंक शाखा की ओर से उपभोक्ता को चार हजार की राशि ना तो लौटाई गई है और ना ही खाते में जमा की गई है। ऐसे में दुकानदार बेहद परेशान है तथा बार-बार बैंक शाखा के चक्कर लगाने को मजबूर है। इस संबंध में शाखा प्रबंधक से बात करनी चाही लेकिन बैंक शाखा के बेसिक फोन को किसी ने रिसीव नहीं किया। बैंक खुला होने के बाद भी फोन पर केवल घंटी बजती रही।





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