धर्मेन्द्र यादव
प्रयागराज
कुम्भ मेले में आए इन गायक कलाकारों को जानने के बाद बिहारीजी का दोहा याद आता है कि इन मुसलमान हरिजनन पर कोटिन हिन्दू वारिए,,,। एक तरफ हिन्दू ही शास्त्रीय संगीत और पाठ पूजा को भूला रहे हैं जिसे ये तीन मुसलमान कलाकार जीवित रखने के अलावा आगे फैला रहे हैं। इसमें भी खास बात यह है कि एक कलाकार तो पेरिस से चलकर कुम्भ मेले में आए हैं। मूल निवासी तो राजस्थान के हैं लेकिन कुम्भ में साधु-महात्माओं के बीच में सुर सरिता बहा रहे दिलीप खां, बाबू खां सद्दाम व रोशन से आपका भी परिचय कराते हैं। दिलीप व बाबू खां तो हॉरमोनियमअ के साथ संगीत सुना रहे हैं। वहीं तबले पर सद्दाम व ऑर्गन पर रोशन उनका बखूबी साथ दे रहे हैं।
चार में से तीन मुसलमान कलाकार
दिलीप खान राजस्थान के लाडनू के रोडू गांव के मूल निवासी हैं। जयपुर में भी निवास हैं। लेकिन इस समय पेरिस कार्य स्थली है। जहां वे भारतीयों के अलावा विदेशियों को शास्त्रीय संगीत सुनाने के अलावा इसकी शिक्षा भी दे रहे हैं। खुद मुसलमान हैं। नमाज भी पढ़ते हैं। लेकिन शास्त्रीय संगीत के साथ भजन, गजल व सूफी गायन से भारतीय पहचान को स्वर लहरियों के जरिए विदेशों में भी छोड़ रहे हैं। पिछले सात दिनों से कुम्भ मेले साधु महात्माओं के शिविरों में पहुंचकर वहां भजन, गीत व गजल से गंगा में सुर सरिता मिलाने का काम कर रहे हैं। जब दिलीप खान से पूछा गया कि मुसलमान होकर ***** धर्म के गीत संगीत को आगे बढ़ा रहे हैं तो उनका जवाब था कि मन लाग्या मेरा राम फकीरी मे,,,। यह भी कहा कि कार्य ही पूजा है। जहां कला को इज्जत मिलती है वही उनकी दौलत है। यूरोप में कई बड़े टीवी चैनलों पर भी इनके कार्यक्रम प्रस्तुत हो चुके हैं। करीब एक दर्जन से अधिक देशों में भारतीय शास्त्रीय संगीत को आगे बढ़ा रहे हैं। ी
बाबू खां तो रामलीला भी करते आ रहे
हारमोनियम पर ठुमरी, ख्याल व भजन के जरिए शास्त्रीय संगीत को आगे बढ़ा रहे बाबू खां ने सन्यासी बाबा भगवानदास से शिक्षा ली।संगीत की डिग्री हासिल कर चुके हैं। वे भी कुम्भ में बाबाओं के बीच रहकर शास्त्रीय संगीत को खुशबू देने का काम कर रहे हैं। यही नहीं बाबू खां तो रामलीलाएं भी करते आ रहे हैं।उन्होंने बताया कि उनके गुरु ने मेले में उनको एक शिवलिंग दिया है। जिसकी वे नियमित रूप से पूजा करेंगे। नमाज भी पढ़ते हैं। उनका कहना है कि मन को सांत्वना मिले वहीं काम कर रहा हूं। गुरुद्वारे भी जाता हूं।





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