रक्तिम तिवारी/अजमेर.
सृष्टि रचयिता प्रजापिता ब्रह्मा और सूफियत का पैगाम देने वाले ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के शहर बरसों से एक अद्भुत रिश्ते से बंधे हुए है। इसमें सर्वपंथ समभाव की एक ‘ खुश्बू’ दिखती है। इस महक से देश-दुनिया तक सौहार्द का संदेश जाता है।
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती 11 वीं शताब्दी में अजमेर आए थे। यहीं से गरीबों की सेवा, परस्पर प्रेम और सूफी शिक्षाओं का पैगाम दिया। यहीं उनकी मजार शरीफ और दरगाह बनी हुई है। अजमेर से महज 11-12 किलोमीटर दूर स्थित प्रजापिता ब्रह्मा की नगरी पुष्कर का भी दरगाह से अद्भुत संबंध बन चुका है।
चढ़ता है पुष्कर का गुलाब
पुष्कर क्षेत्र के लाल, गुलाबी गुलाब की महक पूरे देश-दुनिया में अलग ही पहचान है। यहां तिलोरा, कानस, होकरा, बूढ़ा पुष्कर क्षेत्र में बढ़े पैमाने पर गुलाब की खेती होती है। यहां का लाल-गुलाबी गुलाब बरसों से गरीब नवाज की मजार शरीफ पर चढ़ाया जा रहा है। प्रतिदिन फूलों के व्यापारी गुलाब के फूल लेकर अजमेर आते-जाते हैं। इस गुलाब की महक से ख्वाजा साहब की दरगाह गुलजार रहती है।
ऐसी खुश्बू नहीं कहीं और...
पुष्कर के गुलाब की महक बेहद अलग है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पुष्कर क्षेत्र में सरस्वती नदी का बहाव क्षेत्र भी माना गया है। इस नदी का पानी मीठा था। यही वजह है, कि पुष्कर क्षेत्र के गुलाब में अलग महक होती है। पुष्कर के निकटवर्ती नंदा सरस्वती और बूढ़ा पुष्कर क्षेत्र में सरस्वती नदी की मौजूदगी अभी भी बताई जाती है।





No comments:
Post a Comment