फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा 20 मार्च को होली का पर्व परपंरागत रूप से उत्साह व उमंग के साथ मनाया जाएगा। इस दिन भद्रा रहित समय में होलिका दहन किया जाएगा। इस दिन भद्रा प्रात: 10.45 बजे से रात्रि 8.59 बजे तक रहेगी। पंडित यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात्रि 9 बजे से 9.34 है। होलिका दहन से पूर्व दोपहर में महिलाएं होलिका का पूजन करेंगी। शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा को होली जलाने की परंपरा रही है। होली पर घरों में पकवान बनाए जाते हैं। इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और पूजा के बाद ही व्रत खोलती है।
इसके अगले दिन धुलंडी का पर्व मनाया जाता है। धुलंडी पर रंग व गुलाल से होली खेली जाती है। शाम को मंदिरों में भगवान व भक्तों की होली होती है।
धुलंडी के अगले दिन 22 मार्च को भैया दोज का पर्व मनाया जाएगा। जिसमें बहनें भाई दोज की कथा सुनती हैं और अपने भाईयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं । भाई भी सदा अपनी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है।
इधर, धुलंडी के साथ ही महिलाओं का लोक प्रिय पर्व गणगौर भी शुरु हो जाएगा। जिसमें नवविवाहिताएं सौलह दिनों तक गणगौर की पूजा करती हैं। गणगौर के गीत गाए जाते हैं।





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