भगवान न करे, लेकिन शिक्षा नगरी में भी इस तरह का कोई बड़ा हादसा हो जाए तो बड़ी बात नहीं...
कोटा/बूंदी . में अवैध खनन के दौरान हुई मजदूरों की मौत की घटना के बाद भी प्रशासन नहीं जागा है। भगवान न करे, लेकिन शिक्षा नगरी में भी इस तरह का कोई बड़ा हादसा हो जाए तो बड़ी बात नहीं। प्रशासन की आंखों में धूल झोंंक कर के विभिन्न इलाकों में अवैध खनन किया जा रहा है। अवैध खननकर्ता शहर की धरा को छलनी कर सोना लूट रहे हैं। मामला भामाशाह मंडी क्षेत्र का है।
लंबे अर्से से यहां अवेध खनन का खुला खेल चल रहा है। जमीन चाहे वन विभाग की हो या नगर विकास न्यास की कोई सुध लेने वाला नहीं है। इससे अवैधखनन कर्ताओं के हौसले बुलंद हो रहे हैं।
यह देखे गए हालात
पत्रिका संवाददाता ने दो दिन तक लगातार भामाशाह मंडी, हाईवे आसपास के क्षेत्र को देखा तो कुछ इसी तरह के हालात नजर आए। खुले पड़े मैदानों में जगह जगह ट्रेक्टर जमा थे और पत्थरों को फोड़ा जा रहा था। कुछ टे्रक्टर ट्रोलियों में पत्थरों को भर रहे थे, तो कई भरकर मुख्य मार्ग पर ले जा रहे थे। हालात से हो गए कि अवैध खनन ने जगह जगह गहरे गढ्डे हो गए।
कई जगहों पर इन गड्ढों ने गहरी खाईयों का रूप ले लिया। मौके से गुजर रहे लोगों ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि यह आज का खेल नहीं, हर दिन क्षेत्र में हथोड़े चलते हैं, कई बार तो ब्लास्टिंग की आवाज भी आती है। क्षेत्र में रोज बड़ी मात्रा में खनन होता है। वन विभाग कार्रवाई करता है तो कुछ दिन काम रूक जाता है, पिर लोग खनन करना चालू कर देते हैं।
बरसात में हालात हो जाते हैं गंभीर
बरसात के दिनों में अवैध खनन से हुए गढ्ढे मुसीबत का सबबबन जाते हैं। इनमें पानी भर जाता है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। गत वर्ष पानी से भरे गहरे गड्ढे में तीन बालकों की डूबने से भी मौत हो गई थी। ताजा उदाहरण बूंदी जिले के सुनगर गांव का है, वहां हाल ही में अवैध खनन के दौरान 4 मजदूरों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद प्रशासन सावचेत नहीं हुआ है।





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