आबूरोड. लोकसभा चुनाव की आचास सहिंता लागू होने के साथ ही प्रदेशभर में ग्रामीण विकास और पंचायतीराज विभाग के सौ दिवसीय कार्ययोजना के कई काम अटक गए है। जिसका कारण जिला परिषद के अधिकारियों की ओर से बरती गई ढिलाई सामने आई है। विभाग के अधिकारियों ने 8 फरवरी को विडीयो कांफ्रेस में सभी जिला परिषदों को संबंधित जिले में चल रहे विकास कार्यो को 100 दिन कार्ययोजना में शामिल कर 28 फरवरी तक स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अधिकतर जिला परिषदों की ओर से कई कार्यो की स्वीकृतियां जारी नहीं की गई। उल्लेखनीय है कि फरवरी माह में सरकार ने कई विभागों के अधिकारियों को इधर-उधर किया और बाद में भी लगातार तबादले होते रहे। इससे अफसरों में असमंजस बना रहा। ग्रामीण विकास व पंचायतीराज विभाग के कई अधिकारियों ज्वाइंन तथा रिलीविंग होने में ज्यादा समय बीत गया और सरकार की 100 दिन की कार्ययोजना पर किसी का ध्यान नहीं गया। इसके बाद अधिकारियों की पोल ५ मार्च को वीडिय़ों कांफ्रेंस की ८ मार्च को जारी कार्यवाही विवरण से सामने आई। इसमें ग्रामीण आवास योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास कार्यक्रम, मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन समेत अन्यों विभाग के कार्यो की प्रगति रिपोर्ट जारी की गई है। जिन जिलों का काम की प्रगति धीमी रही तथा कार्यो की स्वीकृतियां शेष रही, उन्हें 8 मार्च तक का समय दिया था, लेकिन कई जगहों पर विकास कार्यो की स्वीकृतियां जारी नहीं हो सकी।
जिले में यह स्थिति
मनरेगा कार्यो के तहत जिले में100 दिन के लिए जिला परिषद की ओर से चारागाह विकास, मॉडल तालाब, श्मशान विकास तथा खैल मैदान के लिए ६४८ कार्य स्वीकृत करने थे, लेकिन उनमें से मात्र ४८८ कार्य ही हो पाए। शेष १६० कार्यो की स्वीकृतियां आचार संहिता में अटक गई।
तो गिरेगी गाज
विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने चेताया था कि जिन जिलों में सरकार के निर्देशों की पालना करने में गंभीरता नहीं दिखाई और २८ फरवरी तक अंतिम समय में स्वीकृतियां जारी नहीं की गई, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब इन निर्देशों पर ध्यान नहीं देने वाले अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।





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