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photo story: निजी विद्यालय प्रशासन की नहीं चलेगी मनमानी

आबूरोड. प्रदेश में निजी विद्यालय पुस्तकें, कॉपियां, गणवेश आदि खरीदने के लिए विद्यार्थी और अभिभावक को बाध्य नहीं कर सकेंगे। इनकी खरीदारी में चल रही निजी विद्यालयों की मनमानी को रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंम्भिक को पूरी तरह से नजर रखने के लिए आदेशित किया है। प्रारंम्भिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक की ओर से जारी पत्र में कहां गया है कि निजी विद्यालयों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को विद्यालय में ही पाठ्य पुस्तकें, कॉपियां, यूनिफॉर्म, बेल्ट, टाई एवं जूते आदि खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है और इनकी एवज में भारी भरकम राशि वसूली जाती ह ै। कई बार दुकान विशेष से ही उक्त सामग्री खरीदने के लिए कहा जाता है। निजी विद्यालयों की इस मनमानी रोकने के लिए निर्देश दिए है, इसकी पालना नहीं होने पर मान्यता समाप्त करने की भी चेतावनी दी है।
एक माह पहले सूची
निजी विद्यालय अपने विवेक के अनुसार एनसीईआरटी, राजस्थान पाठ्य पुस्तक मंडल, प्रारंम्भिक शिक्षा बोर्ड या निजी प्रकाशकों द्वारा पाठ्यक्रम के अनुसार प्रकाशित पाठ्य पुस्तकों में से विद्यार्थी के लिए पुस्तों का चयन कर सकेंंगे। शिक्षण सत्र आरंभ होने के एक माह पहले पुस्कों की सूची, लेखक का नाम, प्रकाशक का नाम और पुस्तक का मूल्य विद्यालय के सूचना पट्ट या वेबसाइट पर प्रदर्शित करना होगा। यहीं नही विद्यार्थी या अभिभावकों की मांग पर सूची उपलब्ध कराना होगा, ताकि वे बाजार से अपनी सुविधााुसार पाठ्यक्रम क्रय कर सकते है।
यह भी दिए निर्देश
- पुस्तकों के अलावा निजी विद्यालयों की ओर से निर्धारित यूनिफॉर्म, टाई, जूते, कॉपियां आदि भी छात्र व अभिभावक बाजार से खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे।
- किसी भी सामग्री पर शिक्षण संस्था का नाम अंकित नहीं होगा। शाला परिसर में पुस्तकें समेत अन्य सामग्री नहीं बेच सकेंगे।
- छात्र या उनके अभिभावकों पर विद्यालय से सामग्री ेलेने का दबाव नहीं बनाया जाएगा।
- निजी विद्यालय की ओर से निर्धारित की गई यूनिफॉर्म पांच साल तक नहीं बदली जाएगी।
- निजी विद्यालयों के पाठ्यक्रम व अन्य सामग्री अनुशांसित होगी, वह कम से कम तीन दुकानों पर अनिवार्य रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।
लिखित में दे सूचना
जिले में पाबंदी के बाद भी किसी निजी विद्यालय में ऐसा मामला सामने आता है, तो अभिभावक या छात्र लिखित में प्रारंम्भिक या माध्यमिक शिक्षा अधिकारी को सूचना दे। उसके बाद संबंधित के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
- नरेन्द्रसिंह आढ़ा, आरटीई प्रभारी सिरोही।



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