आबूरोड. शहर में लोग चौपहियां वाहन खरीदते समय घर में पार्किंग स्थल का शपथ पत्र परिवहन विभाग को दे तो रहे है, लेकिन बाद में इसकी पालना नहीं कर रहे है। सड़क पर ही वाहन को खड़ा कर देते है। शहर के अंदरूनी हिस्से में तो बाशिंदों के पास तो परिवहन विभाग के इस नियम, कायदे करने की कोई गुंजाइश तक नहीं है। इन लोगों को मकानों से काफी दूर खुली जगह में वाहन पार्क करने पड़ते हैं, लेकिन शहर में नई बस रही कॉलोनियों के लोग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। जबकि कोई भी चार पहिया खरीदने से पहले पार्किंग स्थल का शपथ पत्र, परिवहन विभाग के नियम के अनुरूप देना होता है। हद तो यह भी है कि कई घरों में पार्किंग स्थल होने के बावजूद उनमें रहने वाले लोग भी उनके वाहन भी सड़क पर खड़े रखते हैं।
तो बनते है चालान
शहर समेत जिलेभर में प्रतिदिन अव्यवस्थित वाहन खड़ा करने से कोई न कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना का शिकार होता है या फिर जाम की स्थिति बन जाती है, लेकिन उक्त वाहन मालिकों के खिलाफ न तो परिवहन विभाग और न ही पुलिस का यातायात विभाग कोई कार्रवाई करता। कभी-कभार चालान बनाकर कर्तव्य पूरा कर लिया जाता है।
छह साल पुराने हैं आदेश
न्यायालय के आदेशों की पालना में परिवहन आयुक्त एवं प्रमुख शासन सचिव ने समस्त जिला परिवहन अधिकारी एवं पंजीयन अधिकारियों को वर्ष 2012 में निर्देश दिए थे। उक्त निर्देशों की पालना में जिला परिवहन अधिकारी व पंजीयन अधिकारी शपथ पत्र व घोषणा पत्र लेने के बाद ही चारपहिया पंजीयन करते हैं, लेकिन उक्त आदेश को वाहन मालिक गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। आबूरोड परिवहन विभाग में ३ हजार ७०४ कार, ७८० टैक्सी व १ हजाार ३७५ ऑटो पंजीकृत है, लेकिन कुछ वाहन मालिकों को छोड़कर किसी के पास पार्किंग स्थल नहीं है।
यह है स्थिति
शहर के मुख्य बाजार, अम्बाजी चौराहा, नगरपालिका मार्ग, जूनी खराड़ी, गांधीनगर, सांतपुर, रीको, समेत नई विकसित कॉलोनियों में ज्यादातर वाहन सड़क पर खड़े रहते है। यहां पर आमजन सड़क के काफी आगे वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे सुबह से शाम तक कई बार जाम की स्थिति बनती है। लोग हादसे का शिकार होते हैं।
इनका कहना...
वाहन लेने समय सभी को पार्किंग स्थल का शपथ पत्र अनिवार्य रूप से देना होता है, इसके बाद भी कारें सड़कों पर खड़े करते है, तो कार्रवाई की जाएगी तथा झुठे दस्तावेज पेश करने का मामला भी दर्ज किया जा सकता है।
- मनीष शर्मा, जिला परिवहन अधिकारी आबूरोड।





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