रक्तिम तिवारी/अजमेर.
राजस्थान लोक सेवा आयोग में सौर ऊर्जा का उपयोग अब तक शुरू नहीं हुआ है। प्रतिमाह लाखों रुपए का बिजली का बिल चुकाया जा रहा है। इसके बावजूद यहां सौर पैनल लगाने और ऊर्जा का वैकल्पिक स्त्रोत तैयार करने की कवायद नहीं हुई है।
केंद्र और प्रदेश सरकार ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोत के रूप में सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है। कई सरकारी और निजी दफ्तरों, स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालयों, स्ट्रीट लाइट सहित किसानों ने खेतों में सौर पैनल लगाए हैं। इससे विद्युत ऊर्जा की खपत काफी हद तक कम हुई है। साथ ही संस्थाओं-कार्यालयों को आर्थिक लाभ भी हो रहा है। राजस्थान लोक सेवा आयोग इस मामले में पीछे है।
अब तक डिस्कॉम पर निर्भर
आयोग अब तक अजमेर डिस्कॉम से प्राप्त बिजली पर निर्भर है। यहां परीक्षा, संस्थापन, पुस्तकालय, डाक-संप्रेषण और अन्य विभाग-अनुभाग डिस्कॉम की बिजली से रोशन हैं। इसकी एवज में आयोग को प्रतिमाह लाखों रुपए का बिल चुकाना पड़ रहा है। ऐसा तब है जबकि परीक्षाओं और परिणाम निकालने के दौरान आयोग का कामकाज कई बार दिन-रात चलता है।
नहीं लगाए हैं सौर पैनल
आयोग ने सौर ऊर्जा का उपयोग करने के लिए अब तक छतों पर पैनल नहीं लगवाए हैं। जबकि सौर ऊर्जा के उपयोग से उसके बिजली के बिल में काफी बचत हो सकती है। साथ ही सौर ऊर्जा प्लान्ट से उत्पन्न बिजली को आयोग अजमेर डिस्कॉम को बेचकर आय बढ़ा सकता है। हालांकि अध्यक्ष दीपक उप्रेती ने सौर पैनल लगाने की इच्छा जरूर जताई है।
यह संस्थाएं सौर ऊर्जा से रोशन
क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, एडीए, सम्राट पृृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, मयूर स्कूल और अन्य। जल्द महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में भी सौर ऊर्जा का उपयोग शुरू हो जाएगा।
सावधान हो जाइए जरा.....
-धरती पर बढ़ता तापमान, मौसस चक्र में बदलाव
-रोज बढ़ रहा है पर्यावरण प्रदूषण
-पिघलते जा रहे हैं ग्लेशियर
-बढ़ रही है पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता
-ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोत अपनाने की जरूरत





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