आबूरोड. तहसील समेत जिले के ग्रामदान गांवों के पास बुनियादी सुविधाएं के पास नहीं होने से काश्तकार खासे परेशान है। इन ग्रामदानी कार्यपालिका का कार्यकाल पूरा होने के कई वर्षों बाद भी इनके चुनाव कर मनोनयन नहीं किया गया है।अध्यक्ष का मनोनयन के बाद तीन वर्ष का कार्यकाल होता है, लेकिन बारह वर्षहोने के बावजूद नए चुनाव नहीं हुएहैं।
तहसील क्षेत्र की बात करें तो यहां के दस ग्रामदानी गांवों की कार्यपालिका की बैठक के लिएकोईकार्यालय निर्धारित नहीं है। ऐसे में कार्यपालिका की बैठक कभी पंचायत भवन तो कभी खुले आसमान तले होती है। आदिवासी बाहुल्य भाखर क्षेत्र के आधा दर्जन ग्रामदानी गांवों की स्थिति भी बेहाल है, इन गांवों में पटवारी के अधिकार व शक्तियां ग्रामदानी अध्यक्ष के पास रहती है। बोर्ड के वित्तीय अधिकार पंचायतीराज के पास चले जाने से इन गांवों के स्वयं के भवन तक नहीं बन पाए हैं।यहां दिलचस्प बात यह है कि लम्बे समय से अध्यक्ष पद के लिए चुनाव नहीं हुए हैं।ऐसे में कार्यकाल पूरा होने के बावजूद एक ही ग्रामदानी अध्यक्ष कार्यरत है।सरकार ने आचार्य विनोबा भावे के सपनों को साकार करने के लिए वर्ष 1971 में कई गांवों में ग्रामदानी गांवों की स्थापना की थी, लेकिन ग्रामदानी गांवों का कानून ऐसा है कि स्थानीय प्रशासन इसमें हस्तक्षेप नहीं कर पाता है। इन गांवों की भूमि के निर्णय ग्रामदानी ग्रामसभा के अध्यक्ष व कार्यपालिका सदस्य ही ले सकते हैं।
घुमता फिरता कार्यालय
इन गांवों में राजस्व वसूली लगान के रूप में अध्यक्ष ही करता है। स्वयं का कोई कार्यालय नहीं होने के कारण गर्मी, सर्दी व वर्षा में कभी इधर कभी उधर बैठक बदलनी पड़ती है।राजस्व रिकॉर्ड संभालना भी मुश्किल हो जाता है। कई जगहों पर ग्रामदानी सम्बंधित दस्तावेज कार्यालय के अभाव में अध्यक्ष व सदस्यों के घर में ही रखे जा रहे हैं।
बोर्ड अध्यक्ष को करवाया गया थाअवगत
जून २०१८ में चंडेला गांव के आम्बावेरी वशिष्ठधाम में तत्कालीन ग्रामदानी बोर्ड अध्यक्ष रामनारायण नागवा के समक्ष ग्रामदानी सदस्यों व अध्यक्षों ने इस समस्या से अवगत करवाया था, लेकिन जनसुनवाई के एक वर्ष बाद भी समस्या का निराकरण नहीं हो सका है।
इन गांवों में नहीं है ग्रामदान सभा भवन
तहसील क्षेत्र के ग्रामदानी गांवों में से निचलीबोर, भैसासिंह, पाबा, निचलागढ़, खारा, निचलाखेजड़ा, आम्बा, फोरेस्ट चोटिला व चोटिला पूर्ण ग्रामदानी गांव है। वहीं चण्डेला आशिंक ग्रामदानी गांव है। चण्डेला में सेवलिया फली, आम्बावेरी व चोरवा फली ग्रामदानी क्षेत्र में शामिल है।
इन्होने कहा ...
भाखर क्षेत्र के गांवों में ग्रामदान सभा भवन नहीं होने से खुले आसमान तले बैठक लेनी पड़ रही है। आधारभूत सुविधाएं नहीं होने से परेशानी होना लाजिमी है।
- भूताराम, ग्रामदानी अध्यक्ष, निचलागढ़
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अब तक करीब बारह वर्ष से खारा गांव को छोड़कर ग्रामदानी गांवों के चुनाव नहीं हुएहैं।खारा गांव में चार-पांच माह पूर्व ही निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया था।
- गेनाराम गरासिया, ग्रामदानी अध्यक्ष, खारा





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